सीएनएन न्यूज भारत ब्यूरो महराजगंज :: बाढ़ बचाव को लेकर यहां तैयारियां शुरू हो गई हैं। डीएम अनुनय झा ने जिला स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी की बैठक लेकर 30 मई से पहले बंधों का निरीक्षण करते हुए रेनकट व रैटहोल वाली जगहों को चिह्नित करने और बरसात से पहले बचाव कार्य पूरा कराने का सख्त निर्देश दिया।

डीएम ने कहा कि बाढ़ बचाव के लिए बोल्डर्स, बालू भरी बोरियां, जीओ बैग्स, अन्य सामग्री व स्टाफ-मजदूरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें। अतिसंवेदनशील एवं संवेदनशील तटबन्धों पर किए गए कार्यों का सत्यापन तथा निरीक्षण कार्य कराते हुए रिपोर्ट उपलब्ध कराएं।

अधिशाषी अभियंता सिंचाई को वर्षा अवधि में बाढ़ क्षेत्रों में न्यूनतम 3 सहायक अभियंताओं की ड्यूटी लगाते हुए सुनिश्चित करने को कहा कि सभी अधिकारी ड्यूटी प्वाइंट पर रहें।सभी एसडीएम/तहसीलदारों को कन्ट्रोल रूम की स्थापना करके उसमें शिफ्टवार ड्यूटी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

तहसील कन्ट्रोल रूम के नम्बर का आम जनमानस में प्रचार-प्रसार कराये जाने के लिए भी कहा। बाढ़ प्रभावित ग्रामों के लोगों की डायरेक्टरी बनायी जाये, जिसमें उनके मोबाईल नम्बर आदि का ब्योरा रखा जाए।

अधिकारियों व नाविकों के मोबाइल नंबर तैयार करें डीएम ने कहा कि बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने से पूर्व जिम्मेदार जिला स्तरीय अधिकारियों, कर्मचारियों व नाविकों के मोबाइल नंबर व पते की डायरेक्टरी तैयार कर ली जाए। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नावों का विवरण एकत्र करते हुए नाविकों व गोताखोरों की सूची बनाई जाए। बाढ़ संभावित ग्रामों के परिवारों का विवरण भी तैयार कर लें।

उन्होंने कहा कि बीमार व अशक्त लोगों सहित पांच साल तक की आयु के बच्चों की सूची अलग से बनाएं। बाढ़ राहत सामग्री व अन्य जरूरी सामग्रियों की व्यवस्था की तैयारी टेंडर के माध्यम से किया जाए। जरूरी दवाओं का इंतजाम समय से पहले हो जाना चाहिए।

छिड़काव के साथ ड्यूटी चार्ट बना लिया जाए। जिले में हैं 19 तटबंध एक्सईएन सिंचाई ने बताया कि जिले में 19 तटबंध स्थित हैं।

इनमें संवेदनशील बन्धों की संख्या 10 है और नौ अतिसंवेदनशील बंधे हैं। इनकी कुल लम्बाई लगभग 164 किमी है। जनपद में कुल 7 प्रमुख नदियां है, जिनकी लम्बाई लगभग 350 किमी है। तटबंधों के किनारे स्थित ग्रामों पर 39 बाढ़ सुरक्षा समितियों का गठन कर लिया गया है। जिला मुख्यालय पर 1, सिंचाई विभाग 1 व तहसील मुख्यालयों पर 4 मिलाकर 6 बाढ़ कंट्रोल रूम संचालित हैं। रिजर्व स्टाक के रूप में तटबंधों के निकट स्टोर पर बालू, मोरंग, खाली नई / पुरानी सीमेन्ट के बोरे की व्यवस्था कर ली गयी है। जनपद में कुल 286 गोताखोर / तैराकों को चिह्नित किया गया है। 29 बाढ़ चौकियों, 24 खाद्यान्न वितरण स्थल, 17 पशु शरणालय स्थल, 19 राहत शिविर स्थापित हैं। इसके अलावा 123 नाव और 205 सम्बद्ध नाविकों को सूचीबद्ध की गई है।

बैठक में सीडीओ अनुराज जैन, डीएफओ निरंजन सुर्वे राजेंद्र, अपर जिलाधिकारी डॉ. पंकज कुमार वर्मा सहित सिंचाई विभाग और अन्य सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

Un simple bouillon peut transformer une recette de restaurant, même sans ingrédients coûteux. Les techniques qui expliquent ce résultat méritent d'être étudiées plus en détail. fouet manuel ou électrique : réussir la génoise Le café refroidit vite sur le comptoir, et cette simple scène prolonge naturellement la réflexion. En cuisine, une recette réussie tient aussi au rythme du service, à la fraîcheur des produits et à la précision des gestes.