सहसवान- श्रावण मास के शुक्ल तृतीया को मनाया जाने वाला हरियाली तीज का पर्व इस बार भी महिलाओं के उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर से लेकर गांव तक हर जगह हरियाली, मेंहदी और गीत-संगीत का माहौल देखने को मिला।

सुबह से ही महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर हरे रंग की साड़ियां और चूड़ियां पहनीं। मंदिरों में शिव-पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की गई। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, इसलिए सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और अविवाहित लड़कियां मनचाहा वर पाने के लिए व्रत रखती हैं।

झूले और लोकगीतों की धूम
पार्कों और घरों के आंगनों में बांस के झूले सजाए गए। महिलाएं समूह में “कजरी”, “तीज के गीत” और “झूला झूलो री” गाते हुए झूले झूलती नजर आईं। वहीं मेंहदी लगाने, पकोड़े-घेवर खाने और खेलों की प्रतियोगिताएं हुईं।

गृहिणी सुमन माहेश्वरी ने कहा, “तीज सिर्फ त्यौहार नहीं है, ये महिलाओं के मिलने-जुलने और खुशियां बांटने का दिन है। साल भर इंतजार रहता है इस दिन का।”
वहीं कॉलेज की छात्राओं ने भी कैंपस में हरियाली तीज सेलिब्रेशन किया और पर्यावरण बचाने का संदेश देते हुए पौधे लगाए।

बाजार में भी रौनक
तीज को लेकर बाजारों में हरे चूड़े, मेंहदी, झूलों और श्रृंगार के सामान की खूब बिक्री हुई। हलवाई की दुकानों पर घेवर, गुझिया और फेनी की मांग सबसे ज्यादा रही।

प्रशासन ने भी प्रमुख मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि महिलाएं बिना किसी दिक्कत के त्यौहार मना सकें।

हरियाली तीज के साथ ही अब रक्षाबंधन की तैयारियां भी शुरू हो जाएंगी।