सहसवान/बदायूँ – तहसील सहसवान में धर्म और इतिहास की जमीन पर भू-माफियाओं ने जो खेल खेला है, उसका पर्दाफाश हो गया है। हिन्दू शक्ति दल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 3 पेज का विस्फोटक ज्ञापन देकर सीधे आरोप लगाया है कि प्रशासन के अंदर बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से सैकड़ों बीघा मंदिर और प्राचीन धरोहर की जमीन को फर्जी कागजों से बेच दिया गया।
मंदिर की जमीन पर फर्जी वसीयत का काला कारनामा
सबसे बड़ा धमाका श्री बिहारी जी महाराज और श्री रामचन्द्र जी के प्राचीन मंदिर की जमीन को लेकर है। ज्ञापन के अनुसार, गोपालगंज के ईसापुर नवादा और फतनपुर चुंगी की लगभग 3 बीघा 2 बिस्वा कीमती जमीन और 3 दुकानों को 1998 में एक बिना-रजिस्ट्री वाले फर्जी वसीयतनामे से हड़प लिया गया और फिर टुकड़ों में बेच दिया गया। जनता कई साल से SDM से लेकर DM तक चक्कर काट रही है, लेकिन फाइलें आज भी दबाई जा रही हैं।
सरसोता की 500 बीघा जमीन कहाँ गायब हो गई?
भगवान परशुराम की तपोभूमि सरसोता (सूरजकुंड) के नाम रेवेन्यू रिकॉर्ड में 400 बीघा कच्ची और 100 बीघा पक्की जमीन दर्ज है। आरोप है कि सरसोता कमेटी की आड़ में तहसीलदार, लेखपाल और माफियाओं के गठजोड़ ने सैकड़ों बीघा जमीन पर अवैध निर्माण करा दिया। अब मांग उठी है कि जिला जज और तहसीलदार से केयरटेकिंग छीनकर सीधे ASI को दी जाए और पूरे क्षेत्र को भगवान परशुराम कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए।
किले से लेकर शत्रु संपत्ति तक पर कब्जा?
ज्ञापन में यह भी आरोप है कि त्रेता युग के महाराजा सहस्त्रबाहु (कार्तवीर्य अर्जुन) के खंडहर किले पर और नगर पालिका की सरकारी जमीनों, भगता, नगला सब्जी, मंडी समिति और शत्रु संपत्तियों पर भी फर्जी दस्तावेजों से कब्जा किया गया है।
हिन्दू शक्ति दल की सीधी चेतावनी
संगठन ने मांग की है कि –
- सारी जमीनों की उच्च स्तरीय जांच हो और कब्जा खाली कराया जाए।
- दोषी अधिकारियों और भू-माफियाओं पर गैंगस्टर एक्ट लगे।
- सहसवान का नाम बदलकर सहस्त्रबाहु नगर किया जाए और सभी प्राचीन स्थलों का सुंदरीकरण हो।
अंत में संगठन ने साफ चेतावनी दी है – अगर 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो मामला सीधे हाईकोर्ट में जाएगा।
अब देखना ये है कि योगी सरकार का बुलडोजर इन भू-माफियाओं पर कब चलता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।