सहसबान- गांव भीकमपुर टप्पा जमिनी के किसान बेसहारा गोवंश पशुओं से अपनी गेहूं की फसल बचाने के लिए दिन-रात खेतों की रखवाली करने को मजबूर है, शासन के दावों के बावजूद किसान इन पशुओं से हो रहे नुकसान से उबर नहीं पा रहे हैं, ब्लॉक और पशुपालन विभाग के अधिकारी किसानों के फोन तक नहीं उठाते हैं,किसान बढ़ती महंगाई के बीच बड़ी मुश्किल से खाद बीज जूटा कर गेहूं, आलू, सरसों, और अरहर जैसी फसलें तैयार कर रहे हैं ।लेकिन गांव के बाग बगीचों और खेतों में घूम रहे बेसरा पशु इन फसलों को चरकर भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता गेहूं की फसल को बचाने की है, यह पशु रात को खेतों में घुसकर फसल को नष्ट कर देते हैं। जिसके चलते किसान काफी परेशान है ।वहीं किसानों का आरोप है, कि इस गांव के ओर पास कहीं भी कोई गौशाला तक नहीं है, जिससे छुट्टा गोवंशो के लिए गौशालाओं में छोड़ दिया जाए मौजूदा समय में गेहूं की फसल तैयार हो रही है। और बेसरा पशुओं द्वारा इस फसल को चरकर बर्बाद किए जाने का खतरा बना हुआ है। किसान जुल्फिकार ने बताया कि सांड और गाय महीनों से गेहूं की फसल को नष्ट कर रहे हैं। नाइम ने कहा कि शिकायत के बाद भी पशुपालन व पंचायत विभाग बेसरा पशुओं की व्यवस्था नहीं कर रहा है किसान शादाब और सफीक अहमद का कहना है कि किसी तरह फसल तैयार की गई है लेकिन पशु चरकर लाखों की हानि कर रहे हैं।

Un simple bouillon peut transformer une recette de restaurant, même sans ingrédients coûteux. Les techniques qui expliquent ce résultat méritent d'être étudiées plus en détail. fouet manuel ou électrique : réussir la génoise Le café refroidit vite sur le comptoir, et cette simple scène prolonge naturellement la réflexion. En cuisine, une recette réussie tient aussi au rythme du service, à la fraîcheur des produits et à la précision des gestes.