सहसबान-बदायूं। कहते हैं कि अगर नीयत साफ हो और इरादा नेक हो तो तस्वीर बदलते देर नहीं लगती। इस बात को सच कर दिखाया है जनपद बदायूं के युवा, तेज तर्रार और ईमानदार ज्वाइंट मजिस्ट्रेट शौर्य अरोड़ा ने।
पदभार ग्रहण करने के कुछ ही दिनों में उन्होंने अपनी कार्यशैली से यह साबित कर दिया है कि वे कुर्सी पर बैठने नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने आए हैं।
दरवाजा सबके लिए खुला, हर फरियाद सुनी जाती है
उनके कार्यालय की सबसे बड़ी पहचान बन गई है – सबकी सुनो, सबका करो। गरीब हो या अमीर, किसान हो या मजदूर, हर व्यक्ति अपनी समस्या लेकर सीधे उनसे मिल सकता है। वे न सिर्फ धैर्यपूर्वक जनता की समस्याओं को सुनते हैं, बल्कि मौके पर ही अधिकारियों को फोन कर उसका तुरंत निस्तारण भी कराते हैं। जनता में चर्चा है कि अब तारीख पर तारीख नहीं, तुरंत न्याय मिलता है।
माफियाराज पर ब्रेक, ईमानदारी से कोई समझौता नहीं
जहां एक ओर वे आम जनता के लिए बेहद सरल और सौम्य हैं, वहीं माफियाओं, अवैध खनन करने वालों और सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के लिए सख्त तेवर अपनाए हुए हैं। उनकी सख्ती के चलते भूमाफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
स्वास्थ्य के नाम पर खिलवाड़ करने वालों पर गरजे अरोड़ा
नगर में गली-गली में खुले अवैध अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ उन्होंने जो अभियान छेड़ा है, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है। गरीब मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले कई अवैध अस्पतालों पर ताला लगवा कर उन्होंने यह संदेश दिया है कि सहसबान में अब अवैध कारोबार नहीं चलेगा।
आज सहसवान की जनता खुद कह रही है कि ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में उन्हें एक सच्चा जनसेवक मिला है। शौर्य अरोड़ा सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि जनपद के लिए ईमानदारी की एक नई उम्मीद बनकर उभरे हैं।