
हाल ही में हुए अग्निकांडों के बाद फायर विभाग की कार्यप्रणाली और संसाधनों को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारियों की कमी, पर्याप्त सुपरविजन का अभाव और पदों पर लंबित प्रमोशन जैसी समस्याएं आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्य को प्रभावित कर सकती हैं।
फायर विभाग के कर्मचारियों के अनुसार किसी भी बड़ी आग की घटना में मौके पर पहुंचने वाली पहली फायर गाड़ी पर पर्याप्त स्टाफ होना बेहद जरूरी है। सामान्य तौर पर पहली गाड़ी पर कम से कम छह से सात कर्मचारियों की आवश्यकता होती है, क्योंकि मौके पर पहुंचने के बाद कुछ कर्मचारी रेस्क्यू ऑपरेशन संभालते हैं और कुछ आग बुझाने की कार्रवाई में लगे रहते हैं। यदि स्टाफ कम हो तो राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो सकता है।

विभागीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि बड़े शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ में दो मुख्य अग्निशमन अधिकारियों (CFO) की तैनाती का प्रावधान वर्ष 2022 में किया गया था, लेकिन अभी तक इसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। इसके पीछे विभागीय स्तर की प्रक्रियाओं और अन्य कारणों को जिम्मेदार बताया जा रहा है।
इसके साथ ही फायर विभाग में कई अधिकारियों के प्रमोशन भी लंबे समय से लंबित बताए जा रहे हैं, जिससे विभागीय ढांचे और कार्यक्षमता पर असर पड़ने की बात कही जा रही है।
जानकारों का कहना है कि बड़े अग्निकांड के दौरान प्रभावी सुपरविजन बेहद महत्वपूर्ण होता है। उनका तर्क है कि यदि किसी जिले में वरिष्ठ स्तर पर पर्याप्त निगरानी व्यवस्था नहीं हो तो निर्णय लेने और राहत कार्यों के संचालन में कठिनाई आ सकती है।
फायर विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि कई स्तरों पर तकनीकी और विभागीय अनुभव रखने वाले अधिकारियों की भूमिका बढ़ाने की जरूरत है, जिससे फायर सेफ्टी, एनओसी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।
वहीं विभाग में लंबे समय से नई भर्तियां नहीं होने के कारण मैनपावर की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। फायर स्टेशनों पर पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता, आधुनिक उपकरणों का संचालन और समय पर रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत बताई जा रही है।
फायर विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते शहरीकरण, ऊंची इमारतों, होटल, अस्पताल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या को देखते हुए विभागीय ढांचे को मजबूत करना, पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराना और प्रभावी सुपरविजन व्यवस्था लागू करना समय की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में होने वाली अग्नि दुर्घटनाओं में जनहानि को कम किया जा सके।