बदायूं। सहसवान तहसील में आम जनता के काम सरकारी बाबू नहीं, बल्कि “प्राइवेट लोग” कर रहे हैं। आरोप है कि कई लेखपालों और आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों ने बिना किसी सरकारी आदेश के निजी व्यक्तियों को कुर्सी पर बैठा रखा है। नतीजा तहसील में भ्रष्टाचार चरम पर और फरियादी दर-दर भटक रहा है।
तहसील आने वाले दर्जनों लोगों का कहना है कि खतौनी, पैमाइश, आय-जाति प्रमाण पत्र और राशन कार्ड जैसे कामों के लिए जब वे लेखपाल से मिलते हैं, तो कुर्सी पर कोई “प्राइवेट लड़का” बैठा मिलता है। यही लोग फाइल आगे-पीछे करते हैं और काम के बदले अवैध वसूली करते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी वजह से बिना पैसे दिए कोई काम नहीं हो रहा। “सरकारी कर्मचारी तो 10 बजे आते हैं, लेकिन वसूली सुबह 9 बजे से शुरू हो जाती है” – एक फरियादी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।
राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार लेखपाल का काम सिर्फ लेखपाल ही कर सकता है। किसी भी प्राइवेट व्यक्ति को सरकारी रजिस्टर, कंप्यूटर या दस्तावेज छूने का अधिकार नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टाफ की कमी के नाम पर ये “निजी व्यवस्था” भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अगर किसी भी तहसील में प्राइवेट व्यक्ति सरकारी काम करता पाया गया तो संबंधित लेखपाल पर सख्त कार्रवाई तय है।
जनता की एक ही मांग
“हमें दलाल नहीं, सरकारी कर्मचारी चाहिए। जो काम की रसीद दे और बिना रिश्वत के काम करे”।