छत पर लटकी जान! सहसवान के स्कूली बच्चे ई-रिक्शा की छत पर सवार, हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन”

ओवरलोड ई-रिक्शा बने मौत के खिलौने, स्कूल संचालक, चालक और अफसर सब मौन

सहसवान- स्कूल की घंटी बजते ही सहसवान की सड़कों पर बच्चों की जान से खिलवाड़ शुरू हो जाता है। सहसवान विद्यालय के छात्र-छात्राएं ई-रिक्शा की छत पर बैठकर सफर करने को मजबूर हैं।

एक तरफ सरकार “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” का नारा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ मासूम अपनी जान हथेली पर रखकर स्कूल पहुंच रहे हैं।

नियम ताक पर, जिंदगी दांव पर
तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि ई-रिक्शा में सीटें फुल होने के बाद भी चालक बच्चों को छत पर बैठाकर तेज रफ्तार से दौड़ा रहे हैं। जरा सा ब्रेक लगा या गड्ढा आया तो नतीजा क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी ऐसे लापरवाह सफर की वजह से कई बड़े हादसे हो चुके हैं। फिर भी स्कूल संचालकों का लालच और चालकों की मनमर्जी कम नहीं हो रही।

जिम्मेदार कौन, जवाब दे।
स्कूल संचालक किराया बचाने के लिए सस्ते ई-रिक्शा का ठेका ई-रिक्शा चालक 4 की जगह 10-12 बच्चों को ठूंस रहा आखिर अध्यापक सब कुछ जानते हुए भी अनजान क्यों बने हुए हैं क्या वो कोई बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं।

अभिभावकों ने कहा कि “अगर कल को कोई हादसा हो गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। जो ऐसे विद्यालय संचालक एवं ई रिक्शा चालक के खिलाफ कार्रवाई करने में क्यों हैं।