सहसवान- बदायूं। सब्जी-फल की मंडी तो सुनी थी, पर यहां तो रास्ते की मंडी लगती है। सहसवान समिति मंडी का हाल ऐसा कि ग्राहक कम, दुकानदार और गाड़ियां ज्यादा।
मंडी के बीचों-बीच रास्ते पर ही व्यापारी भाइयों ने अपनी दुकानें सजा लीं। जहां से लोग निकलें, वहां आलू-प्याज के ढेर। रही-सही कसर ई-रिक्शा और ट्रकों ने पूरी कर दी। मंडी का गेट ही इनका “पक्का स्टैंड” बन गया। ट्रक वाले भाई तो ऐसे खड़े होते हैं जैसे बोल रहे हों पहले हमें हटाओ, फिर दुनिया देखो”।
रोज आने-जाने वाले राहगीर बताते हैं कि सुबह-सुबह तो मंडी पार करना मतलब “अग्निपथ” पार करना। बुजुर्गों को सहारा चाहिए, महिलाओं को बच्चों को गोद में उठाकर निकलना पड़ता है। कुछ व्यापारियों द्वारा मंडी के अंदर एवं ओर दुकानों को लगाकर जाम को लगा दिया जाता है जिसके चलते काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।
एक स्थानीय ने तंज कसा, “एम्बुलेंस को भी यहां से निकलने के लिए मुहूर्त देखना पड़ेगा। मंडी है या बाधा-दौड़ का ट्रैक
नियम कहते हैं कि सार्वजनिक रास्ता रोकना जुर्म है। मंडी समिति की जिम्मेदारी है कि रास्ता साफ रखे। पर यहां तो लगता है सबने आंखें मूंद ली हैं।
अब देखना ये है कि जिम्मेदार अधिकारी कब नींद से जागते हैं, या जनता को ही “सेल्फी विद जाम” अभियान चलाना पड़ेगा।