सहसवान- वालों, नगर पालिका को धन्यवाद दो। इनकी ‘लापरवाही की बदौलत’ मोहल्ला मुहीउद्दीनपुर को फ्री का स्विमिंग पूल मिल गया है। बस दिक्कत ये है कि पानी RO का नहीं, नाले का है।

नगर पालिका की ‘ऐतिहासिक लापरवाही’
मोहल्ले वाले सालों से गंदे पानी में डुबकी लगा रहे हैं, और नगर पालिका आराम से AC में बैठकर फाइलें देख रही है। सबसे बड़ी लापरवाही तो नगर पालिका की ही है। न नाली साफ, न पानी निकासी का इंतजाम। हालत ये है कि बस्ती में गंदा पानी तालाब बनकर खड़ा है और पालिका के अफसर कुंभकरण की नींद सो रहे हैं।

जनता करे तो क्या करे?
मुहीउद्दीनपुर में आवागमन मतलब रोज का एडवेंचर। बच्चे कीचड़ में स्कूल जाते हैं, बुजुर्ग लाठी टेककर पानी नापते हैं, और बाइक वाले स्किड होकर भगवान को याद करते हैं। एम्बुलेंस तो मोहल्ले का बोर्ड देखकर ही U-टर्न मार लेती है। मरीज को कंधे पर लादकर मेन रोड तक लाओ, तब इलाज शुरू होगा।

वादा vs हकीकत
चुनाव में हर नेता यहां आकर ‘विकास की गंगा’ बहाने का वादा कर जाता है। लेकिन जीतने के बाद नगर पालिका के साथ-साथ वो भी गायब। मोहल्ले वाले पूछ रहे हैं, “साहब, टैक्स तो पूरा लेते हो, सुविधा कब दोगे? या फिर हमें भी नगर पालिका ऑफिस के सामने गंदा पानी भर देना चाहिए?”

जनता का तंज
अब मुहीउद्दीनपुर की जनता का पारा सातवें आसमान पर है। लोग बोल रहे हैं, “नगर पालिका या तो नाली बनवा दे, या फिर इस ‘गंदे वेनिस’ को टूरिस्ट स्पॉट घोषित करके एंट्री टिकट लगा दे। कम से कम पालिका की कमाई तो होगी।”

नोट: नगर पालिका के अफसरों से गुजारिश है, अगर इधर आने की हिम्मत करें तो रेनकोट, लाइफ जैकेट और डेटॉल साथ लाएं। यहां सूखे निकलना तो दूर, बीमार हुए बिना लौटना मुश्किल है!

सवाल सीधा है: नगर पालिका जी, कब जागोगे? या फिर मुहीउद्दीनपुर वालों को मगरमच्छ पालने का लाइसेंस दे दो? 😤