दंहगबा, सहसवान। भाजपा के युवा तुर्क नेता मयंक गुप्ता अपने पिता, क्षेत्र के प्रतिष्ठित समाजसेवी नरेश गुप्ता के दिखाए रास्ते पर चलकर जनसेवा की मिसाल बन गए हैं। दंहगबा स्थित आवास अब “न्याय का मंदिर” बन चुका है, जहां रोजाना सुबह पिता-पुत्र की जोड़ी जनता की समस्याएं सुनती है और तुरंत समाधान कराती है।

1. “संस्कार पिता से, सेवा जनता की”: हर फरियादी को मिल रहा सहारा
सुबह 9 बजे से ही मयंक गुप्ता के आवास पर लोगों की कतार लग जाती है। खास बात ये है कि मयंक के साथ उनके पिताजी नरेश गुप्ता भी पूरे समय मौजूद रहते हैं। नरेश गुप्ता अपने दशकों के सामाजिक अनुभव से हर मामले में मार्गदर्शन करते हैं, तो मयंक गुप्ता युवा ऊर्जा से तुरंत अधिकारियों को फोन कर कार्रवाई कराते हैं। बुजुर्गों को कुर्सी देना, बहन-बेटियों की बात सम्मान से सुनना – ये संस्कार मयंक को विरासत में मिले हैं।

2. “एक फोन पर समाधान” का फॉर्मूला हिट
पिता-पुत्र की इस जोड़ी की पूरे क्षेत्र में चर्चा है। शिकायत मिलते ही मयंक गुप्ता SDM, तहसीलदार या थानाध्यक्ष को फोन लगाते हैं, और नरेश गुप्ता जी अपने पुराने संपर्कों से फॉलोअप लेते हैं। बिजली, पानी, राशन कार्ड, पेंशन, सड़क व पुलिस से जुड़ी सैकड़ों शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कराया जा चुका है।

3. “जनसेवा की पाठशाला है ये घर”
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि नरेश गुप्ता ने सालों तक निस्वार्थ सेवा की और अब वही जज्बा मयंक में दिखता है। बुजुर्ग कहते हैं, “नरेश जी ने जो पौधा लगाया था, मयंक उसे वटवृक्ष बना रहा है। नेता हो तो ऐसे, बाप-बेटे दोनों जनता के लिए समर्पित।”

मयंक गुप्ता ने कहा: “पिताजी ने हमेशा सिखाया कि राजनीति का मतलब सिर्फ कुर्सी नहीं, सेवा है। मोदी जी-योगी जी की प्रेरणा और पिताजी के आशीर्वाद से जनता की सेवा ही मेरा संकल्प है। मेरा घर दंहगबा की जनता का घर है।”

नरेश गुप्ता ने कहा: “बेटे को जनता के बीच काम करते देख गर्व होता है। मैंने हमेशा कहा है – पद रहे न रहे, जनता का प्यार सबसे बड़ी पूंजी है। मयंक वो पूंजी कमा रहा है।”

दंहगबा में अब एक ही चर्चा है – “नरेश जी के संस्कार और मयंक भैया की सेवा, समस्या कोई भी हो समाधान पक्का है।”