सहसवान- प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलना सहसवान की एक गरीब महिला के लिए मुसीबत बन गया है। मोहल्ला दहलीज निवासी तरन्नुम पत्नी असद को योजना के तहत पहली किस्त के 1 लाख रुपये तो मिल गए, लेकिन अब अपना आशियाना बनाने के लिए वह दर-दर भटक रही है।
पीड़िता तरन्नुम का आरोप है कि मकान निर्माण शुरू करते ही उसके मोहल्ले के ही कुछ लोगों ने काम रुकवा दिया। और उससे अवैध रूप से आधी राशि की मांग कर रहे हैं। मना करने पर धमकियां दी जा रही हैं और कहा जा रहा है कि पैसे नहीं दिए तो मकान नहीं बनने देंगे।
हैरानी की बात ये है कि जबकि आरोपी का इस जमीन पर कोई कानूनी हक ही नहीं है। सिविल जज जूनियर डिवीजन, सहसवान की कोर्ट में मुकदमा नंबर 94/1991 में अनवर अली ने खुद वादी गढ़ मसर्रत हुसैन के हक में मुकदमा छोड़ दिया था। इस मामले में 28 जुलाई 2005 को मसर्रत हुसैन के हक में फैसला हो चुका है। यानी 19 साल पहले ही अनवर अली कोर्ट में लिखित रूप से इस संपत्ति से अपना दावा छोड़ चुका है। इसके बावजूद वह अब PMAY के पैसे में हिस्सा मांग रहा है।
तरन्नुम ने बताया कि पहले भी उसने थाने में शिकायत की थी। पुलिस जांच में शिकायत सही पाई गई थी, मगर आरोपियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा अब आरोपियों का दबाव और धमकियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। दबंगों की धमकी से परेशान होकर पीड़िता और उसका परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है।
मजबूर होकर पीड़िता ने शनिवार को उपजिलाधिकारी सहसवान एवं मुख्यमंत्री पोर्टल पर IGRS के जरिए न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर आरोपियों पर रंगदारी मांगने और सरकारी योजना में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज हो। साथ ही 2005 के कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए पुलिस सुरक्षा में उसका मकान बिना बाधा के बनवाया जाए और भविष्य में धमकी मिलने पर आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
PMAY जैसी महत्वपूर्ण योजना में दबंगई के चलते एक गरीब महिला को उसका हक नहीं मिल पा रहा है। अब देखना है कि प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है।