सहसवान / बदायूँ : साहब बदल गए, कुर्सी बदल गई, बोर्ड पर नाम बदल गया… लेकिन सहसवान कोतवाली में कहानी वहीं की वहीं है!
चर्चा पूरे कस्बे में है कि सहसवान कोतवाली के कुछ खास हल्कों पर तैनात सिपाही पिछले 2 साल से भी ज्यादा समय से एक ही जगह पर ‘स्थायी पट्टे’ की तरह जमे हुए हैं। थाना प्रभारी आए और चले गए, उनके कार्यक्षेत्र बदले, सर्किल बदला, लेकिन हल्के पर बैठे सिपाहियों का साम्राज्य नहीं हिला।
सवाल तो थाना प्रभारी की कार्यशैली पर भी उठ रहा है। आखिर जब शासन और DGP मुख्यालय का साफ आदेश है कि एक ही जगह 3 साल से ज्यादा कोई नहीं रहेगा, एक ही हल्के में 2 साल बाद रोटेशन जरूरी है, तो सहसवान में इस आदेश की धज्जियां कैसे उड़ रही हैं।
स्थानीय लोगों में कानाफूसी तेज है – “क्या हल्के का हिसाब-किताब इतना ‘मजबूत’ है कि कोई थाना प्रभारी उसे छूना नहीं चाहता?”
लंबे समय तक एक ही हल्के में जमे रहने से सेटिंग-गेटिंग, वसूली और पीड़ितों की अनदेखी की शिकायतें आम हो जाती हैं। नया पीड़ित थाने आता है तो उसे वही पुराना चेहरा मिलता है, और पुराने चेहरे के साथ पुराना रवैया भी।
अब देखना ये है कि थाना प्रभारी महोदय कार्यक्षेत्र बदलने में कितना संज्ञान लेते हैं या फिर ये ‘जमी हुई व्यवस्था’ यूं ही चलती रहेगी।
मांग : वहीं नगर की जनता ने तेजतर्रार थाना प्रभारी नरेश पाल सिंह से मांग की है कि एक ही हल्के पर जमे सिपाहियों के कार्य क्षेत्र बदले जाएं जिससे जनता के बीच एक नई उम्मीद जागे
