बदायूं ने दिखाया दम, दिल्ली पुलिस के छूटे पसीने!

दिल्ली के साकेत थाने में महिला पत्रकारों को घसीट-घसीट कर पीटने की शर्मनाक घटना पर जहां देश के बड़े-बड़े पत्रकार संगठन सिर्फ निंदा पत्र जारी कर रहे थे, वहीं उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले ने सीधा राष्ट्रपति भवन तक हुंकार भर दी!

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद (रजि.) के जिला अध्यक्ष सुमित मल्होत्रा के नेतृत्व में आज बदायूं कलेक्ट्रेट में जो हुआ, उसने साबित कर दिया – जब बात पत्रकारों के सम्मान की हो, तो बदायूं पीछे नहीं रहता!

क्या है वो खौफनाक कहानी जिसने देश को हिला दिया?

3 सितंबर, साकेत मैक्स अस्पताल। मंच पर देश के गृहमंत्री अमित शाह और दिल्ली की CM रेखा गुप्ता। 4PM न्यूज नेटवर्क की दो निडर महिला पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान सिर्फ एक सवाल पूछना चाहती थीं।

आरोप है – सवाल पूछते ही सीन पलट गया। दोनों को बाल पकड़कर घसीटते हुए साकेत थाने ले जाया गया। थाने के अंदर कमरा बंद… और फिर जो हुआ वो रूह कंपा देगा!

पत्रकारों का आरोप है – “खान सरनेम सुनते ही लाठियां और तेज़ बरसने लगीं, धर्म पूछकर गालियां दी गईं।” वीडियो में नफीसा की जांघ पर डंडे के लाल निशान और शाहीन के हाथों पर चोट साफ दिख रही है।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया समेत 5 बड़े संगठनों ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है, जबकि दिल्ली पुलिस इसे “भ्रामक” बता रही है।

बदायूं की दहाड़ – राष्ट्रपति तक पहुंची गूंज

इसी को लेकर आज बदायूं जिलाधिकारी कार्यालय में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद ने राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन देकर 4 बड़ी मांगें दाग दीं –

1. CBI जैसी उच्च स्तरीय जांच हो, CCTV फुटेज सुरक्षित रखो!
2. साकेत SHO समेत सभी दोषी पुलिसकर्मी तुरंत सस्पेंड हों!
3. महिला पत्रकारों को सुरक्षा कवच मिले!
4. पत्रकारों पर हाथ उठाने वालों के लिए अलग कानून बने!

ज्ञापन सौंपते हुए जिला अध्यक्ष सुमित मल्होत्रा ने कहा – “ये दो महिला पत्रकारों पर हमला नहीं, पूरे चौथे स्तंभ पर हमला है। अगर आज हम चुप रहे तो कल हर पत्रकार पिटेगा। बदायूं का पत्रकार डरता नहीं, आर-पार की लड़ाई लड़ता है।”

इस मौके पर परिषद के पदाधिकारी मौजूद रहे।

अब निगाहें राष्ट्रपति भवन पर – क्या बदायूं की इस पहल के बाद जागेगी दिल्ली पुलिस?

बदायूं से उठी इस आवाज ने साफ कर दिया है – राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद सिर्फ नाम की नहीं, काम की संस्था है!