सहसवान, बदायूं: तहसील परिसर में फिल्मी ड्रामा आखिर 4 घंटे बाद खत्म हुआ। ओवरहेड टैंक पर चढ़ा रसूलपुर कलां का जितेंद्र उर्फ बंडा समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी गजेंद्र यादव के समझाने पर नीचे उतर आया।
कैसे माने ‘टंकी वाले बंडा’?
टंकी के नीचे पुलिस-प्रशासन की तमाम मिन्नतें फेल हो गईं। माइक, एम्बुलेंस, पानी… सब बेअसर। माहौल तब बदला जब मौके पर सपा प्रत्याशी गजेंद्र यादव पहुंचे। उन्होंने टंकी के नीचे से ही जितेंद्र से बात की और भरोसा दिलाया- “तुम्हारे 50 साल पुराने मकान पर कोई आंच नहीं आने दूंगा। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराऊंगा और दोषियों पर कार्रवाई होगी।”
गजेंद्र यादव के आश्वासन और लिखित कार्रवाई के भरोसे के बाद जितेंद्र नीचे उतरा। उतरते ही उसने गजेंद्र यादव को कागजों का पुलिंदा सौंपा।
तहसील में ‘भ्रष्टाचार की टंकी’ भी ओवरफ्लो
इस पूरे ड्रामे ने तहसील प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील में बिना ‘चढ़ावे’ के फाइल आगे नहीं बढ़ती।
जितेंद्र का आरोप और गंभीर है। उसका कहना है कि उसने दबंग के ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे की शिकायत की, तो उल्टा उसी के 50 साल पुराने मकान को ‘अवैध’ बताकर कागजी खेल शुरू हो गया। सवाल ये है कि क्या तहसील के बाबुओं की मिलीभगत के बिना रातों-रात किसी का पुश्तैनी मकान ‘ग्राम सभा की जमीन’ पर बता देना मुमकिन है। ग्रामीणों ने दबी जुबान कहा कि यहां ‘दबंग’ की कलम चलती है और गरीब की फरियाद फाइलों में दब जाती है। जानलेवा हमले के बाद भी पुलिस की चुप्पी इसी ‘सिस्टम’ की तरफ इशारा करती है।
गजेंद्र यादव ने मीडिया से कहा, “ये सिर्फ जितेंद्र की लड़ाई नहीं, सिस्टम से परेशान हर गरीब की लड़ाई है। मैं DM से मिलकर पूरे प्रकरण और तहसील में चल रहे भ्रष्टाचार की जांच की मांग करूंगा। 50 साल से बसे परिवार को बेघर नहीं होने देंगे।”
फिलहाल जितेंद्र को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है। लेकिन बड़ा सवाल अभी भी टंकी पर टंगा है- क्या वाकई ‘इंसाफ की टंकी’ भरेगी या फिर ये आश्वासन भी फाइलों में सूख जाएगा।