सहसवान / नाधा – कहते हैं डॉक्टर भगवान का रूप होता है, लेकिन नाधा क्षेत्र में भगवान के रूप में मौत के सौदागर घूम रहे हैं।
गली-गली में बिना डिग्री, बिना रजिस्ट्रेशन के झोलाछाप डॉक्टरों ने अस्पतालों का मकड़जाल फैला रखा है और स्वास्थ्य विभाग आँख बंद करके कुंभकर्णी नींद में सोया है।
बिना डिग्री के हो रहे ऑपरेशन, बोर्ड पर लिखा है – 24 घंटे इमरजेंसी
ताजा हालात ये हैं कि नाधा क्षेत्र में 10वीं-12वीं पास लोग सफेद कोट पहनकर डॉक्टर बन बैठे हैं। बाकायदा बड़े-बड़े बोर्ड – “महिला प्रसव केंद्र, ऑपरेशन की सुविधा”। अंदर जाओ तो न कोई डिग्री, न कोई रजिस्ट्रेशन।
जच्चा-बच्चा की जा रही जान, फिर भी विभाग मौन
स्थानीय लोगों का कहना है, आए दिन इनके गलत इंजेक्शन और गलत ऑपरेशन से किसी न किसी की जान चली जाती है। प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत तो आम बात हो गई है। परिजन रोते-बिलखते रह जाते हैं और ये फर्जी अस्पताल रातों-रात ताला लगाकर भाग जाते हैं, फिर दूसरे नाम से नया बोर्ड लग जाता है।
आखिर इन फर्जी अस्पतालों को संरक्षण किसका?
सबसे बड़ा सवाल – इन मौत के अस्पतालों को संरक्षण किसका प्राप्त है? क्या बिना स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत के धड़ल्ले से अवैध अस्पताल चल सकते हैं?
सूत्रों की मानें तो हर महीने मोटी रकम ऊपर तक पहुँचती है, इसलिए शिकायतों के बाद भी सिर्फ खानापूर्ति के लिए छापा मारा जाता है और फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।