सनातन बोर्ड ने उठाई केंद्रीय सनातन शिक्षा बोर्ड बनाने की मांग
–शिक्षा हेतु ईसाई मिशनरियों के विद्यालयो पर निर्भर सनातन समाज

कल दिनांक 12–7–26 दिन रविवार सायंकाल अखिल भारतीय सनातन बोर्ड जिला बदायूं के कार्यकारिणी पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन बजरंग नगर मीराजी चौकी स्थित देवदत्त शर्मा के आवास पर किया गया

जिला सूचना एवं कार्यालय मंत्री राकेश साहू द्वारा आहूत देर रात तक चली इस बैठक में

हिंदू–सनातनी समाज शिक्षा हेतु ईसाई मिशनरियो द्वारा चलाये जा रहे विद्यालयों पर निर्भर क्यों

इस महत्वपूर्ण विषय पर खुलकर चिंतन मनन और चर्चा की गई

संगठन कार्य अध्यक्ष डॉ सुशील गुप्ता ने बताया
कि मुगलों ने मंदिरों पर आक्रमण कर हमारी संस्कृति को छीना,अंग्रेजों ने गुरुकुलों को नष्ट कर–हमसे देव भाषा संस्कृत छीनी और अब ईसाई शिक्षा व्यवस्था हमसे हमारी मातृभाषा हिंदी छीन रही है,

अंग्रेजी विषय को छोड़कर, इतिहास भूगोल विज्ञान गणित की पुस्तके अकारण ही विदेशी भाषा अंग्रेजी में पढ़ाई जा रही है , इस थोपी गई अंग्रेजी भाषा के कारण हमारे बच्चों में व्यावहारिक ज्ञान,नवाचार और रचनात्मकता प्रभावित हो रही है,

कार्यकारिणी प्रमुख देवदत्त शर्मा ने बताया कि सन 1835 में अंग्रेज अधिकारी लॉर्ड मैकाले द्वारा हमारे गुरुकुलों को नष्ट कर कैसे सनातनी वैदिक शिक्षा व्यवस्था को नष्ट किया गया और
उस समय बनाया गया “इंडियन एजुकेशन एक्ट– 1835” आज भी उसी प्रकार ,हमारे देश में लागू है,
जिससे आज भी हमारी उच्च शिक्षा केवल अंग्रेजी भाषा में ही कराई जाती है,
और
इसी कारण अधिकतर माता-पिता अपने बच्चों की प्राथमिक शिक्षा भी अंग्रेजी माध्यम से कराने के लिए प्रेरित होते हैं,
बच्चों के विकास में अवरोध बन रही इस अवधारणा से अभिभावकों को जल्द बाहर निकलना होगा

मठ मंदिर विभाग प्रमुख एडवोकेट अश्वनी भारद्वाज ने बताया की लॉर्ड मैकाले द्वारा अंग्रेजी शासन को प्राथमिकता देते हुए IPC–इंडियन पीनल कोड 1835 बनाकर कैसे भारतीय न्याय व्यवस्था को भारी क्षति पहुंचाई गई

मुख्य अतिथि एवं सरस्वती शिशु मंदिर मीरा की चौकी के प्रधानाचार्य कालिका प्रसाद ने बताया कि विद्या भारती के हमारे विद्यालय बच्चों को शिक्षा, व्यक्तित्व निर्माण के साथ-साथ संस्कार व माता-पिता का आदर करना, भी सिखाते हैं,
उन्होंने सभी हिंदू परिवारों से आह्वान किया कि विद्या भारती के हमारे विद्यालय न्यूनतम स्कूल फीस लेने के बाद भी उच्च स्तरीय शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं,
उन्होंने बताया कि आज सभी प्रकार के जॉब की चयन प्रक्रियाएं– स्कूल में प्राप्त अंकों के स्थान पर योग्यता पर आधारित हो गई है,
अतः सभी अभिभावको को अपने बच्चों को योग्य और संस्कारी बनाने पर ध्यान देना चाहिए

विशिष्ट अतिथि प्रणव शास्त्री ने बताया कि बदायूं क्षेत्र आदिकाल से वेदों की धरती रहा है इसका पौराणिक नाम वेदामऊ था उन्होंने नगर के सभी मोहल्लों के नामो की व्याख्या करते हुए उनका अर्थ समझाया और बताया कि कैसे स्वामी दर्शनानंद सरस्वती द्वारा सन 1903 में सूर्यकुंड गुरुकुल की स्थापना कर, वेद परंपराओं को पुनर्जीवित करने का कार्य किया गया

कार्यकारिणी प्रमुख केशवनाथ वैश्य ने बताया कि अपने पूर्वजों,अपने नगर के इतिहास को न जानना हिंदू समाज की सबसे बड़ी दुर्बलता है, अतः सभी को अपना और अपने नगर का इतिहास अवश्य जानना चाहिए

नारी शक्ति विभाग अध्यक्षता रचना शंखधार ने बताया कि परिवार में बच्चों और माता-पिता के बीच संवाद हीनता ठीक नहीं है ,
प्रतिदिन अपने बच्चों से अवश्य बात करनी चाहिए और अपनी बेटियों को लेकर अतिरिक्त सतर्कता रखते हुए उसके मित्रों की सूची व मोबाइल नंबर अवश्य बना लेना चाहिए

संगठन अध्यक्ष जितेंद्र साहू ने कहा कि पूर्व सरकारों की गलत नीतियों के कारण आज देश का बहुसंख्यक सनातन समाज शिक्षा के लिए पूरी तरह ईसाई मिशनरियों के स्कूलों पर निर्भर हो गया है,

अतः केंद्र सरकार के समक्ष “केंद्रीय सनातन शिक्षा बोर्ड” बनाने की मांग उठाई जाएगी,

साथ ही उत्तराखंड हरिद्वार स्थित बाबा रामदेव द्वारा स्थापित पतंजलि यूनिवर्सिटी के सहयोग से जनपद में एक आधुनिक गुरुकुल खोलने का प्रयास किया जाएगा,
जहाँ विद्यार्थियों को नियमित विषयों के साथ-साथ योग,दर्शन और संस्कृत जैसे प्राचीन विषयों और आधुनिक विज्ञान की शिक्षा दी जा सकेगी

बैठक में डॉ अशोक कुमार शर्मा,डॉ संजीव गुप्ता ,डॉ अमर सिंह, डॉ नरेंद्र कुमार कश्यप नरेंद्र कुमार गुप्ता, सुभाष मैथिल, अरविंद गुप्ता, नंदकिशोर ,सचिन चौहान, पं मनोज कुमार मिश्रा, राकेश गुलाटी, विनोद कुमार सिंह, मणि भदोरिया, विजय रतन सिंह, मुनीष पाल शर्मा, नरेंद्र कुमार गुप्ता, चंद्र देव वर्मा,
आदि उपस्थित रहे