सहसवान (बदायूँ):तहसील क्षेत्र में मानकों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे अवैध जच्चा-बच्चा अस्पतालों के खिलाफ मीडिया द्वारा प्रमुखता से खबरें प्रकाशित किए जाने के बाद हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक कार्रवाई के डर से फर्जी अस्पताल संचालकों में इस कदर खौफ है कि कई क्लीनिकों और अस्पतालों के बाहर लगे बोर्ड रातों-रात उतार दिए गए हैं।
पिछले लंबे समय से सहसवान और आसपास के ग्रामीण इलाकों में फर्जी तरीके से जच्चा-बच्चा केंद्र (मैटरनिटी होम) चलाए जा रहे थे। जैसे ही मीडिया ने इन अस्पतालों की हकीकत और वहां होने वाले खतरों को उजागर किया, अवैध रूप से क्लीनिक चलाने वाले सक्रिय हो गए। कार्रवाई की भनक लगते ही अधिकांश केंद्रों पर सन्नाटा पसर गया और संचालकों ने आनन-फानन में अपने बोर्ड हटाकर अस्पतालों में ताले लटका दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग की संभावित छापेमारी से बचने के लिए इन अवैध अस्पतालों के संचालक अब अपने रसूखदार ‘आकाओं’ और सफेदपोश नेताओं की शरण में पहुंच गए हैं। सेटिंग-गेटिंग के खेल के जरिए प्रशासनिक कार्रवाई को रुकवाने की जुगत भिड़ाई जा रही है। चर्चा है कि कई संचालक पुराने रसूख का इस्तेमाल कर मामले को रफा-दफा कराने की कोशिशों में जुटे हैं।
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि ये फर्जी अस्पताल न केवल मरीजों की जेब काट रहे हैं, बल्कि प्रशिक्षित स्टाफ न होने के कारण जच्चा और बच्चा दोनों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि केवल बोर्ड उतरने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इन अवैध केंद्रों को स्थायी रूप से सील कर इनके संचालकों पर मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
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