बदायूं। ‘अंतरराष्ट्रीय यज्ञ दिवस’ के अवसर पर रविवार को स्थानीय ऑडिटोरियम में दैनिक योग कक्षा के तत्वावधान में विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। इस दौरान योग और यज्ञ के वैज्ञानिक महत्व पर चर्चा की गई और साधकों ने अपने स्वास्थ्य लाभ के अनुभव साझा किए।
यज्ञ और आयुर्वेद से पांच दिन में नियंत्रित हुई शुगर:
कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण पतंजलि योग पीठ निरामयम से उपचार कराकर लौटे प्रदीप राठौर और उनकी पत्नी स्नेह सिंह राठौर रहे। प्रदीप राठौर ने बताया कि उनकी शुगर कभी 200 से नीचे नहीं आती थी, लेकिन मात्र पांच दिन के योग और यज्ञ उपचार के बाद अब बिना किसी दवा के उनकी शुगर 100 से 125 के बीच रहती है। वहीं, बैंक कर्मी उनकी पत्नी स्नेह सिंह ने बताया कि वह लंबे समय से शरीर के विभिन्न दर्दों से परेशान थीं, लेकिन इस पद्धति को अपनाने के बाद अब वह स्वयं को पूर्णतः रोगमुक्त और ऊर्जावान महसूस कर रही हैं।
यज्ञ कर्मकांड नहीं, एक प्रभावी उपचार पद्धति: योग गुरु
जनपद के योग गुरु गिरधारी सिंह राठौर ने इस अवसर पर ‘हर घर यज्ञ, घर-घर यज्ञ’ का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यज्ञ केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक उन्नत चिकित्सा पद्धति है। अलग-अलग रोगों के उपचार के लिए अलग-अलग औषधीय सामग्रियों (हवन सामग्री) का उपयोग किया जाता है। उन्होंने सभी से साप्ताहिक या दैनिक रूप से यज्ञ करने की अपील की।
वातावरण शुद्धि और दीर्घायु का आधार:
वरिष्ठ साधक भीम सेन सागर ने कहा कि आदि काल से ही वेदों की इस परंपरा के माध्यम से वातावरण को शुद्ध रखा जाता था, जिससे लोग शतायु (सौ वर्ष की आयु) प्राप्त करते थे। यदि आज भी हम इस परंपरा को अपनाएं, तो समाज स्वस्थ और दीर्घजीवी बन सकता है।
इन्होंने दी आहुति :
यज्ञ पुरोहित सुरेंद्र सिंह ने वेद मंत्रों के साथ विधि-विधान से आहुतियां संपन्न कराईं। इस अवसर पर डॉ. आर.पी. सिंह, संजीव चौहान, सतीश सिंह, नरेश पाल गुप्ता, आर्येंद्र गुप्ता, पंकज पाठक, दिनेश चंद्र शर्मा, सत्य प्रकाश, प्रवेंद्र, जनवेद सिंह, रोहिताश सिंह, राजेंद्र पाल, अशोक कुमार, वीरेंद्र सैनी, भगवान स्वरूप गुप्ता, मुकेश सारस्वत, पुष्पेंद्र यादव, दीक्षा कश्यप, संध्या यादव, लबली, और सीमा सहित भारी संख्या में योग साधक उपस्थित रहे।