बदायूं। कादरचौक थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक निजी नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान कथित तौर पर प्रसूता के पेट और सीने पर बैठकर जबरन डिलीवरी कराने की कोशिश की गई, जिससे नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया, जिसके बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया है सीएचसी प्रभारी को पद से हटा दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
ललसी नगला गांव के निवासी छोटेलाल ने अपनी पत्नी कृष्णवती को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार को कादरचौक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि सीएचसी स्टाफ ने स्थिति को गंभीर बताकर उन्हें पास के ही एक निजी अस्पताल ‘राधिका नर्सिंग होम’ ले जाने की सलाह दी। आरोप है कि नर्सिंग होम ने डिलीवरी के नाम पर 15 हजार रुपये लिए और लेबर रूम में एक महिला कर्मचारी ने प्रसूता के पेट पर बैठकर दबाव बनाया, जिससे नवजात की मौत हो गई।
प्रशासनिक कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताएं पाई गईं
अस्पताल सील: मानकों के विपरीत और बिना किसी डॉक्टर की मौजूदगी के संचालित होने के कारण राधिका नर्सिंग होम को तुरंत सीज कर दिया गया है।
सीएचसी पर गाज: सीएचसी के चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. अवधेश राठौर को उनके पद से हटा दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह नर्सिंग होम उनकी बहन का था।
मुकदमा दर्ज: पुलिस ने इस मामले में डॉक्टर समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
