बदायूँ- सहसवान “जीप का सायरन बजा और ‘मिल्खा सिंह’ बन गए गुंडे! धनंजय सिंह के डर से मूंछों का ताव गायब, अब खेतों में काट रहे हैं चक्कर।”

कहते हैं कि जब इलाके का कोतवाल शेर की तरह दहाड़ता है, तो गीदड़ अपने आप दुम दबाकर बिलों में घुस जाते हैं। सहसवान में इन दिनों प्रभारी निरीक्षक धनंजय सिंह का कुछ ऐसा ही ‘खौफ’ और ‘प्यार’ दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। सुजातगंज बेला के जिन दबंगों ने घर में घुसकर महिलाओं पर हाथ उठाया और कानून को अपनी जागीर समझा, उन पर धनंजय सिंह का ऐसा ‘हंटर’ चला है कि उनकी पूरी हेकड़ी हवा हो गई है।

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महिलाओं से उलझे गुंडे, थाना प्रभारी धनंजय सिंह ने चखाया ‘कानूनी स्वाद’!
सुजातगंज के आले नबी और साहिब अली जैसे ‘स्वयंभू’ खलीफाओं ने सोचा होगा कि लाठी-डंडा लेकर महिलाओं को डरा देंगे और बच निकलेंगे। लेकिन साहब, ये धनंजय सिंह की पुलिस है! पीड़ित परिवार जब थाने पहुंचा, तो साहब ने एक ही नजर में बदमाशों की पूरी कुंडली बांच ली। उन्होंने साफ कह दिया— “महिलाओं पर हाथ उठाया है, तो अब जेल की हवा खाने का इंतजाम भी कर लो।”
गंभीर धाराओं की ‘घुट्टी’ और भागते आरोपी!
धनंजय सिंह ने कलम की ऐसी ताकत दिखाई कि दबंगों के खिलाफ बलवा, मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा ठोक दिया। अब हालत ये है कि जो अपराधी कल तक मूंछों पर ताव देकर घूम रहे थे, वो अब पुलिस की जीप का सायरन सुनते ही खेतों की ओर ‘ओलंपिक रेसर’ की तरह भाग रहे हैं। साहब ने साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे पाताल में भी क्यों न छिपा हो, उसे घसीटकर बाहर लाया जाएगा।
जनता बोली: “धनंजय सिंह जैसा कोई नहीं!”
बाजार की चर्चा हो या गांव की चौपाल, हर जगह एक ही बात सुनने को मिल रही है— “जब तक धनंजय सिंह थाने में हैं, तब तक गरीबों का हक छीनने वालों की खैर नहीं!” पीड़ित परिवार को रास्ते में घेरने वाले गुंडों को धनंजय सिंह ने अपनी ‘स्टाइल’ में वो डोज दी है कि अब वो रास्ता बदलने पर मजबूर हैं।
“अपराध का कीड़ा पालने वाले संभल जाएं! धनंजय सिंह के दरबार में इंसाफ के साथ-साथ गुंडों का पक्का इलाज भी मिलता है। मुकदमा दर्ज है, अब पुलिसिया कार्रवाई की बारी है!”