सहसवान में ACMO साहब की टीम का छापा पड़ते ही फर्जी जच्चा-बच्चा केंद्रों में हड़कंप मच गया। आलम ये रहा कि खुद को ‘डॉक्टर’ बताने वाले संचालक अस्पताल का शटर गिराकर ऐसे भागे जैसे पुलिस पीछे लगी हो।
छापे की भनक लगते ही ताले लटक गए, बोर्ड गायब हो गए। मौके पर पहुंची टीम को ज्यादातर अस्पताल बंद मिले। स्थानीय लोग चटकारे लेकर बोले: “अरे भाई, अगर अस्पताल असली थे तो भागे क्यों? ये तो मरीजों की जान से खेलने की फैक्ट्री चला रहे थे।”
नगर में सबसे गर्म चर्चा इसी बात की है कि ACMO की टीम बिना कोई ठोस कार्रवाई किए ही वापस लौट गई। लोग पूछ रहे हैं: इतने दिन से ये अवैध अड्डे चल रहे थे तो स्वास्थ्य विभाग को खबर क्यों नहीं थी? क्या बिना मिलीभगत के ये ‘डिलीवरी की दुकानें’ चल सकती हैं?
पत्रकार संगठन ने तेवर दिखाए: “सिर्फ छापेमारी का ड्रामा नहीं चलेगा। FIR करो, सील ठोको, जेल भेजो।” ACMO ने जरूर कहा है कि अभियान जारी रहेगा, पर जनता का सवाल है: अगर यहां कोई अनहोनी हो गई तो जिम्मेदार कौन?
अब देखना ये है कि ये छापेमारी सिर्फ खानापूर्ति थी या वाकई इन ‘जच्चा-बच्चा फैक्ट्रियों’ पर ताला लगेगा।