सहसवान, बदायूं। केंद्र सरकार गरीबों को पक्का मकान देने के लिए खजाना खोल रही है और सहसवान में कुछ दलाल उसी खजाने को ATM बना बैठे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी का हाल यह है कि जो सच में पात्र हैं वो दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और जो जुगाड़ू हैं उनके मकान की दूसरी किस्त भी आ गई।

नगर के कई वार्डों से एक ही शिकायत आ रही है – “मकान चाहिए तो खर्चा-पानी देना पड़ेगा।”

कैसे चल रहा है खेल?
सूत्रों के अनुसार पूरा रैकेट 3 स्टेप में चलता है:
1. फॉर्म के नाम पर लूट: सर्वे और फॉर्म भरने के नाम पर 500 से 2000 रुपये।
2. जियो-टैग का जाल: फोटो और जियो टैग करने वाले बोले – “साहब को देखना पड़ता है” और 5 हजार वसूल।
3. किस्त पर 10% कमीशन: खाते में 50 हजार की किस्त आई नहीं कि दलाल घर हाजिर – “हमारी वजह से आई है, हमारा हिस्सा?”

पात्र लाभार्थी बताते हैं कि पैसा न दो तो फाइल में ऑब्जेक्शन लग जाता है, और दे दो तो अपात्र होने पर भी मंजूरी मिल जाती है।

सबसे बड़ा सवाल – ये सब नगर पालिका की नाक के नीचे हो रहा है तो आंखें किसने मूंद रखी हैं? सूत्रों की मानें तो इस खेल में सफेद कॉलर वाले कुछ लोकल चेहरे भी शामिल हैं जो अधिकारियों के नाम पर वसूली को जायज ठहराते हैं।

जबकि सच्चाई ये है कि PMAY योजना पूरी तरह निशुल्क है। मंत्रालय ने किसी भी निजी व्यक्ति को पैसा लेने के लिए अधिकृत नहीं किया है।

अब देखना ये है कि खबर छपने के बाद जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागते हैं या फिर दलाल यूं ही गरीबों के सपनों के मकान पर अपना मकान खड़ा करते रहेंगे।