बरेली विकास प्राधिकरण की कार्यशाला में भवन निर्माण नियमों पर हुई विस्तृत चर्चा, उद्यमियों और व्यापारियों ने लिया भाग

बरेली। बरेली विकास प्राधिकरण द्वारा उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2025 तथा आदर्श जॉइनिंग रेगुलेशन 2025 के संबंध में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य नए नियमों को उद्यमियों, व्यापारियों, होटल एसोसिएशन और इंडस्ट्रियलिस्ट्स को समझाना तथा उनके सुझावों को शामिल करना था।

कार्यशाला में शहर के प्रमुख उद्यमी, व्यापारी, होटल एसोसिएशन के प्रतिनिधि,तथा औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। कार्यक्रम का आयोजन IMA हॉल में किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल उपस्थित रहीं। उनके साथ बरेली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष मणिकंदन ए एवं सचिव बंदिता श्रीवास्तव ने भी कार्यशाला को संबोधित किया।

प्रमुख बिंदुओं पर हुई चर्चा:

मानको और ऊंचाई मानकों में शिथिलता
कार्यशाला में बताया गया कि अब विकास के नए मानकों के तहत कुछ क्षेत्रों में ऊंचाई और मानको नियमों में ढील दी जाएगी, जिससे आवासीय व व्यावसायिक परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।

स्वीकृत कॉलोनियों में निर्माण को लेकर छूट:

100 वर्ग मीटर तक के आवासीय निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृति की बाध्यता समाप्त।

30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक निर्माण के लिए भी मानचित्र की आवश्यकता नहीं।
ग्राउंड कवरेज प्रतिबंध हटाए गए: नई नीति में कुछ शहरी क्षेत्रों में ग्राउंड कवरेज पर लगे पुराने प्रतिबंधों को हटाने की बात की गई है।

एफ.ए.आर. में वृद्धि: निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए फ्लोर एरिया रेश्यो एफ.ए.आर में वृद्धि की गई है।

होटल, चिकित्सा सुविधा व औद्योगिक गाइडलाइन में रियायतें: इन सेक्टर्स में मानकों को सरल बनाया गया है, ताकि निवेश को बढ़ावा मिल सके।

जॉइनिंग रेगुलेशन को बनाया गया सरल: अब भूखंडों के सम्मिलन की प्रक्रिया आसान और निवेशकों के लिए आकर्षक होगी।

प्रकाश और वेंटिलेशन नियमों में लचीलापन: आवासीय भवनों में प्राकृतिक प्रकाश और वेंटिलेशन से जुड़े नियमों को व्यवहारिक बनाया गया है।
कार्यशाला में भाग ले रहे व्यापारियों और उद्यमियों ने इन सुधारों का स्वागत किया तथा कुछ तकनीकी सुझाव भी अधिकारियों को दिए।

मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि,
इन संशोधित नियमों का उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देना, निर्माण प्रक्रिया को सरल बनाना और शहरी विकास में तेजी लाना है।

उपाध्यक्ष माणिक्यनंदन ए ने स्पष्ट किया कि इन बदलावों से आमजन, निवेशक, और बिल्डर्स को सीधे लाभ होगा, और अनावश्यक औपचारिकताओं से भी राहत मिलेगी।

कार्यशाला में पूछे गए सवालों का अधिकारियों ने तत्परता से उत्तर दिया और आश्वासन दिया कि सभी सुझावों को संज्ञान में लेकर नीतियों को और अधिक जनसुलभ बनाया जाएगा।

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