सहसवान तहसील में राजस्व विभाग और कथित भूमाफिया गठजोड़ के आरोपों से हड़कंप, लावारिस व मृतक खातेदारों की जमीनों के फर्जी बैनामे और दाखिल-खारिज का मामला

सहसवान (बदायूं)। सहसवान तहसील क्षेत्र में लावारिस और मृतक खातेदारों की जमीनों को कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए हड़पने का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत सुजावली से जुड़े इस प्रकरण में न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM), बदायूं के आदेश के बाद थाना सहसवान पुलिस ने तहसीलदार हरीश चंद्र समेत आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले में राजस्व अधिकारियों और कथित भूमाफियाओं की मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर प्रकरण की विवेचना शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, मुकदमा अपराध संख्या 0493/2026, दिनांक 22 सितंबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत पंजीकृत किया गया है। प्रकरण में धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने तथा उनका असली के रूप में इस्तेमाल करने से संबंधित धाराएं शामिल हैं।

एसएसपी से शिकायत के बाद कोर्ट की शरण में पहुंचे ग्राम प्रधान

मामले के वादी ग्राम प्रधान ब्रह्मचारी पुत्र लक्ष्मी नारायण, निवासी ग्राम सुजावली, ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 28 अक्टूबर 2025 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बदायूं को प्रकरण से संबंधित साक्ष्यों के साथ प्रार्थना पत्र दिया था। शिकायत के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

वादी की ओर से न्यायालय में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किए जाने की बात कही गई है। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर थाना सहसवान में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, दस्तावेजों और संबंधित जमीनों के रिकॉर्ड की जांच करेगी।

पूर्व तहसीलदार, नायब तहसीलदार और लेखपाल पर गंभीर आरोप

दर्ज मुकदमे में तत्कालीन तहसीलदार हरीश चंद्र, तत्कालीन नायब तहसीलदार अनगराज और क्षेत्रीय लेखपाल अछेलाल को भी नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित फर्जी बैनामों के आधार पर जमीनों का दाखिल-खारिज कराने में राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारियों की भूमिका रही।

वादी ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों की मिलीभगत के बिना फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राजस्व अभिलेखों में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती थी। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण पुलिस विवेचना और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगा।

मुकदमे में कुंवरपाल पुत्र रूपराम, लाला राम, नेत्रपाल और लाला राम उर्फ लालू के नाम भी शामिल हैं।

पहला मामला राजपाल के नाम पर कथित फर्जी आधार कार्ड से बैनामा

शिकायत में मौजा पावड़ पुख्ता स्थित गाटा संख्या 966, रकबा 0.020 हेक्टेयर, गाटा संख्या 967, रकबा 0.537 हेक्टेयर और गाटा संख्या 975, रकबा 0.080 हेक्टेयर की जमीन का उल्लेख किया गया है।

वादी के अनुसार, उक्त जमीन के खातेदार राजपाल पुत्र हरनाम गांव छोड़ चुके थे और जमीन लावारिस स्थिति में पड़ी थी। आरोप है कि कुंवरपाल ने राजपाल के नाम पर कथित फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया और स्वयं को राजपाल के रूप में प्रस्तुत करते हुए 28 जुलाई 2022 को अपनी पत्नी रामसनेही के नाम बैनामा करा दिया।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि उक्त बैनामे को सिविल जज जूनियर डिवीजन, सहसवान ने मूलवाद संख्या 219/2022 में 25 फरवरी 2025 को निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद, आरोप के मुताबिक, उसी जमीन से संबंधित एक अन्य फर्जी बैनामा कराने का प्रयास किया गया। इस पूरे मामले में पूर्व में हुए न्यायिक आदेश और नए दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दूसरा मामला मृतक खातेदार भूपाल की जमीन पर फर्जीवाड़े का आरोप

शिकायत में गाटा संख्या 1070, रकबा 0.417 हेक्टेयर और गाटा संख्या 1067, रकबा 0.066 हेक्टेयर जमीन का भी उल्लेख किया गया है। इन जमीनों के खातेदार भूपाल पुत्र डल्ली बताए गए हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी होने का दावा शिकायत में किया गया है।

वादी का आरोप है कि लाला राम उर्फ लालू ने भूपाल के नाम पर कथित फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया और किसी अन्य व्यक्ति को भूपाल के रूप में प्रस्तुत करके जमीन का बैनामा करा लिया।

शिकायत के अनुसार, जब जमीन के क्रेता को कथित अनियमितता की जानकारी हुई तो उसने बैनामा निरस्त कराने के लिए न्यायालय में मूलवाद संख्या 250/2025 दायर किया। इस मामले में भी पुलिस द्वारा संबंधित बैनामा, पहचान दस्तावेज, खातेदार की मृत्यु से संबंधित अभिलेख और न्यायालयीन कार्रवाई की जांच की जानी है।

तीसरा मामला अकबराबाद मेन रोड की कीमती जमीन पर कथित फर्जी रजिस्ट्री

शिकायत में ग्राम हरदत्तपुर की संबंधित गाटा संख्या 11 की जमीन का भी जिक्र किया गया है। यह जमीन मोहल्ला अकबराबाद मेन रोड पर स्थित बताई गई है। वादी के मुताबिक, उक्त जमीन राधेश्याम पुत्र दुर्गाप्रसाद की थी।

आरोप है कि लालू उर्फ लालाराम ने कथित फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए जमीन का बैनामा अपनी पुत्रवधू श्रीमती रामा देवी पत्नी धर्मेंद्र यादव के नाम करा दिया।

इस मामले में बैनामे में प्रयुक्त पहचान पत्र, रजिस्ट्री के दस्तावेज, जमीन के स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की आवश्यकता है। पुलिस विवेचना के दौरान ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दस्तावेजों में किस प्रकार की अनियमितताएं हुईं और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

चौथे मामले समेत कई जमीनों के दस्तावेजों की जांच का मुद्दा

शिकायत में अलग-अलग जमीनों के संबंध में फर्जी पहचान पत्र, बैनामे और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। वादी का कहना है कि इन मामलों में राजस्व अभिलेखों के साथ कथित छेड़छाड़ और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच की जानी चाहिए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित गाटा नंबरों के खतौनी रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज, नामांतरण आदेश, पहचान संबंधी कागजात और पूर्व में दर्ज न्यायालयीन वादों की जांच अहम होगी।

कोर्ट के आदेश के बाद राजस्व विभाग में चर्चा, पुलिस जांच पर निगाह

न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के बाद सहसवान तहसील क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। शिकायतकर्ता ने राजस्व अधिकारियों और कथित भूमाफियाओं पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। वहीं, मुकदमे में नामजद सभी व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच के आधार पर किया जाना बाकी है।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 337, 338 और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इन धाराओं के अंतर्गत लगाए गए आरोपों की विवेचना के दौरान दस्तावेजों की सत्यता, बैनामों की प्रक्रिया, नामांतरण संबंधी रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं।

अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस जांच में फर्जी दस्तावेजों के आरोपों की क्या सच्चाई सामने आती है और जमीनों के कथित फर्जीवाड़े में किस-किस की भूमिका निर्धारित होती है।

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