दुनिया के सबसे बड़े हीरो अयातुल्ला अली खामेनेई
कयामत तक अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत को दुनिया याद रखेगी
बदायूं।पूर्व मंत्री आबिद रज़ा ने नगर पालिका हॉल एक प्रेसवार्ता की जिसमें उन्होंने कहा कि एक मार्च, मरहूम अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत से जाना जायेगा, जब तक दुनिया कायम रहेगी।आज ईरान के सुप्रीम लीडर दुनिया के बहादुर नेता रहवर-ए-इंकलाव अब इस दुनिया में नहीं रहे, इसका अफसोस पूरी दुनिया में उन लोगों को है जो जालिम व जुल्म के सताये हुये है जो कौमे मैदान-ए-अमल में होती है, जनाजे वही उठते है।आज उनकी शहादत से दुनिया में यह पैगाम गया, अपनी जान की परवाह किये बिना, अपने नुकसान की परवाह किये बिना जालिम के आगे न झुकना दुनिया के लिए एक सबक है।अयातुल्ला अली खामेनेई साहब 86 साल के थे लेकिन बहादुरी के लिये जिस्म और उमर भी आड़े नहीं आती, मैं हमेशा कहता हूॅ इंसान के पास दो चीजे होती है एक जिस्म, दूसरी उसकी रूह ,उसकी आत्मा जिस्म की गिज़ा रिज्क होता है। म्गमतबपेम से भी जिस्म को मजबूत बनाया जा सकता है, जिस्म में आदमी ताकतवर बनता है दूसरी चीज इन्सान की रूह उसकी गिज़ा ईमान होता है। आध्यात्मिकता होती है, रूह से मजबूत होने से आदमी बहादुर बनता है। खामेनेई साहब की उम्र भले ही 86 साल की थी लेकिन रूह बहुत मज़बूत भी वह बहादुर थे।जो अल्लाह से डरता है जो सर अल्लाह के आगे झुकता है उस सर को अल्लाह दुनिया में कमजोर नहीं होने देता, वह सर दुनिया में किसी आगे नहीं झुकने नहीं देता अल्लाह ताला ने खामेनेई का सर किसी के आगे झुकने नहीं दिया उस सर को अपने पास बुला लिया। कयामत तक उस सर का नाम दुनिया में जिन्दा रखेगा।
मौत की भी एक काट है लोगो के जहन में जिन्दा रहना सीख लो। जो लोग जालिम के आगे मज़लूम की आबाज उठाते है, जुल्म के खिलाफ लड़ते है, गरीब मजबूत ताकतवर से लड़ते है, उनकी ताकतवर लोग ताकत के बल पर उनकी जान तो ले सकते है, उनकी जिन्दगी तो छीन सकते है लेकिन ऐसे लोग मरते नहीं शहीद होते है, और शहीद होकर लोगो के ज़हन में जिन्दा हो जाते है। आज खामेनेई साहब मरे नहीं है शहीद हुये है पूरी दुनिया जब तक कायम रहेगी लोगो के ज़हन में जिन्दा रहेगे।
दुनिया का ताकतवर मुल्क अमेरिका दुनिया में गुण्डागर्दी की बुनियाद पर ताकतवर बना हुआ है, सारी दुनिया के मुल्क व दुनिया के लीडर बेइज्जत होने के वाबजूद अमेरिका व ट्रंप से दुषमनी मोल नहीं लेना चाहते लेकिन खामेनेई साहब भी अमेरिका और ट्रंप से समझौता कर सकते थे, अच्छी जिन्दगी गुजार सकते थे, लेकिन उन्होने अमेरिका व ट्रंप के खिलाफ जंग लड़ना चुनकर जिन्दगी नहीं, मौत चुनी मैं आबिद रज़ा खामेनेई साहब के ज़ज्बे को सलाम करता हूॅ।
खामेनेई साहब की शहादत जालिमों के खिलाफ न झुकना दुनिया के लिए सबक है।