बदायूं। प्रदेश सरकार जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दंभ भर रही है, लेकिन तंत्र ही उसके दंभ को बेदम कर रहा है। महिला अस्पताल व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नही ले रही है।जनपद के अस्पताल में मेडिकल कालेजों से छात्र छात्राएं इंटर्नशिप के लिए आते हैं। तीन माह तो कुछ छह माह के लिए आते हैं। चिकित्सक, फार्मासिस्ट व जीएनएम  तथा एएनएम और एनए उनको स्वास्थ्य सेवाओं का प्रशिक्षण दिया जाता हैं, लेकिन अस्पताल में कई ऐसी मेडिकल छात्राएं हैं, जिनकी इंटर्नशिप समाप्त हुए साल भर से ज्यादा समय बीत गया है और वह अस्पताल में बैठकर डॉक्टरी कर रही हैं अस्पताल के ओपीडी,लेबर रूम,पीएनसी वार्ड, एसएनसीयू, सर्जिकल वार्ड में बैठकर काम कर रही हैं। डाक्टर उनके हवाले ही पूरा काम छोड़कर गायब हो जाते हैं।कुर्सियों से स्टाफ  गायब रहते हैं और इंटर्नशिप करने वाली छात्राएं अस्पताल में काम देखती है।चाहे व ओपीडी हो लेबर रूम,सर्जिकल वार्ड या पीएनसी वार्ड,एसएनसीयू वार्ड हो महिला अस्पताल में स्टाफ बैठी रहती हैं, जबकि ट्रेंनिग करने वाली छात्राएं मरीजों को इंजेक्शन व दवाई लिख रही  हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की इस बदहाली पर अफसर खामोश बैठे हैं।कई मेडिकल छात्राएं की इंटर्नशिप खत्म हो गई है, लेकिन कमीशन और रुपए कमाने के चक्कर में साल भर से ओपीडी,लेबर रूम,ओटी,पीएनसी वार्ड सर्जिकल वार्ड और अस्पताल में सभी जगह काम संभाल रही हैं। ट्रेनिंग लेने वाली कुछ ऐसी छात्राएं हैं जो ब्लड टेस्टिंग के नाम पर मरीजों से रुपए वसूल रही हैं। इसी बजह से वह लैब में ब्लड सैंपल खुद लेकर आती है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।महिला अस्पताल को कुछ लोगों ने पिकनिक सेंटर बना दिया है और मौज मस्ती लेने आते है जिसमें अस्पताल स्टाफ और ट्रेंनिग वाले लोग शामिल है इसके अलावा बहुत सारे ऐसे काम हो रहे जिनको अधिकारी जानते हुए भी नजरअंदाज कर रहे है। नजारा हर दिन को अस्पताल में देखने मिलेगा। यह सब अस्पताल प्रशासन की मेहरबानी से हो रहा है। इंटर्नशिप करने वाली छात्राएं बैठकर मरीज देखती है। उनका प्रशिक्षण का समय साल भर पहले पूरा हो चुका है। उसके बावजूद भी उन्हें अभी तक रिलीव नहीं किया गया हैं।

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