
अस्पतालों की अनुमति, भू-उपयोग, सड़क की चौड़ाई, सेटबैक, फायर एनओसी और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट समेत विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा
अस्पतालों की अनुमति, भू-उपयोग, सड़क की चौड़ाई, सेटबैक, फायर एनओसी और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट समेत विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा
बरेली, 24 सितंबर। चिकित्सा संस्थानों से जुड़े भवन निर्माण, मानचित्र स्वीकृति और विभिन्न वैधानिक अनुपालनों को लेकर बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की ओर से चिकित्सा क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ “बीडीए विकास संवाद” आयोजित किया गया। गुरुवार को प्रातः 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित बैठक की अध्यक्षता बीडीए उपाध्यक्ष ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा संस्थानों से संबंधित विकास एवं भवन निर्माण के मामलों में प्राधिकरण और चिकित्सा क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा अनुमोदन एवं वैधानिक प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों पर स्पष्टता प्रदान करना रहा।

बैठक में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के करीब आठ प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। इसमें आईएमए के वर्तमान अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल रहे। संवाद के दौरान चिकित्सा संस्थानों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई और प्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए सवालों का नियमानुसार निराकरण किया गया।
अस्पतालों की अनुमति और भू-उपयोग पर चर्चा
बैठक में विभिन्न भू-उपयोग (Land Use) में नर्सिंग होम एवं अस्पतालों की अनुमन्यता, जोनिंग विनियमों तथा भूखंडों के उप-विभाजन (Sub-Division) और समामेलन (Amalgamation) से संबंधित प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी गई। चिकित्सा संघ के प्रतिनिधियों ने इन विषयों से जुड़े कई प्रश्न उठाए, जिन पर बीडीए अधिकारियों द्वारा प्रचलित नियमों एवं प्रावधानों के अनुसार स्थिति स्पष्ट की गई।

इसके अलावा चिकित्सा संस्थानों के लिए आवश्यक न्यूनतम भूखंड क्षेत्रफल, सड़क की चौड़ाई, भवन निर्माण, सेटबैक और अन्य विकास नियंत्रण प्रावधानों पर भी चर्चा हुई।
बैठक में दी गई प्रस्तुति के अनुसार नॉन-बेडेड मेडिकल एस्टैब्लिशमेंट के लिए न्यूनतम 100 वर्गमीटर भूखंड एवं 9 मीटर सड़क, जबकि 50 बेड तक के नर्सिंग होम/छोटे अस्पतालों के लिए 300 वर्गमीटर भूखंड एवं 12 मीटर सड़क का प्रावधान बताया गया। वहीं 50 से अधिक बेड वाले अस्पतालों के लिए 3000 वर्गमीटर भूखंड एवं 18 मीटर सड़क की आवश्यकता के संबंध में जानकारी दी गई।

फायर एनओसी से लेकर बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट तक चर्चा
संवाद के दौरान चिकित्सा संस्थानों में फायर एनओसी, ठोस एवं बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, STP/WWTP की कार्यशीलता तथा दिव्यांगजन एवं अन्य व्यक्तियों के लिए बाधारहित और सुरक्षित पहुंच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई।
इसके साथ ही विमानन सुरक्षा से संबंधित आवश्यकताओं तथा भवन निर्माण पूरा होने के बाद Completion Certificate एवं Occupation Certificate से जुड़े प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। बीडीए की ओर से स्पष्ट किया गया कि चिकित्सा संस्थानों की परियोजनाओं में शुरुआत से ही आवश्यक वैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए नियोजन किया जाना जरूरी है।

आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करने पर जोर
बीडीए उपाध्यक्ष ने चिकित्सा संघ के प्रतिनिधियों से अपेक्षा की कि भवन एवं परियोजनाओं के नियोजन चरण से ही सभी आवश्यक वैधानिक अनुपालनों को ध्यान में रखा जाए। आवेदन प्रस्तुत करते समय जरूरी अभिलेखों को पूर्ण रूप से उपलब्ध कराने तथा अनिवार्य एनओसी एवं अन्य अनुमतियों के लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
उन्होंने निर्माण कार्य पूरा होने के बाद Completion Certificate की प्रक्रिया समय से प्रारंभ करने तथा आवश्यक प्रमाण-पत्र प्राप्त किए बिना भवन का कब्जा न देने संबंधी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।
हितधारकों से सीधे संवाद के जरिए समाधान का प्रयास
बीडीए की ओर से बताया गया कि “बीडीए विकास संवाद” का उद्देश्य विभिन्न हितधारकों के साथ सीधे संवाद स्थापित करना, उनके प्रकरणों एवं व्यावहारिक समस्याओं को समझना और नियमानुसार समाधान उपलब्ध कराना है। इस पहल के माध्यम से विकास एवं भवन निर्माण से जुड़े मामलों में अनावश्यक विलंब को कम करने के साथ-साथ प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
चिकित्सा क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ हुए इस संवाद में अस्पताल एवं चिकित्सा संस्थानों से संबंधित निर्माण और अनुमोदन प्रक्रियाओं को लेकर नियमों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई गई, जिससे भविष्य में प्रकरणों के निस्तारण में बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।