सहसबान, बदायूँ। कहते हैं थाने में ट्रांसफर हर 2-3 साल में होता है, लेकिन सहसबान कोतवाली तो जैसे कुछ सिपाहियों के लिए स्थायी घर बन गई है!
सूत्रों की मानें तो यहाँ कई सिपाही 4 साल से कुर्सी तोड़ रहे हैं, और तो और एक ‘खास’ हल्का तो पिछले 3 साल से एक ही सिपाही लोकेंद्र यादव के कब्जे में है। शासन के नियम ताक पर, और वर्दी का रौब बरकरार!
नगर में चर्चा तेज है – आखिर एक ही हल्के से इतना मोह क्यों? एक ही जगह 4 साल तक जमे रहने से वसूली, सेटिंग और मिलीभगत के चर्चे आम हैं। जनता पूछ रही है कि क्या सहसबान कोतवाली में शासन की ट्रांसफर नीति लागू नहीं होती?
अब सवाल सीधा कप्तान साहब से है। बदायूँ के तेज-तर्रार कप्तान साहब अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं। क्या वह इस ‘जमावड़े’ पर बुलडोजर चलाएंगे? नगर की जनता को कप्तान साहब के सख्त एक्शन का बेसब्री से इंतजार है।