डीएम-एसएसपी की जुगलबंदी को फिर एक बार बरेली की जनता ने सराहा..

आस्था के दो रंग, मोहब्बत का एक शहर; हर-हर महादेव के जयघोष के साथ गूंजीं आला हजरत की सदाएं

कांवड़ियों का सैलाब और उर्स में जायरीनों का हुजूम, जगह-जगह पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत; बरेली ने फिर पेश की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल

इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से चौराहों तक रही पल-पल निगरानी, खुफिया विभाग और इंटेलिजेंस की रिपोर्ट पर तत्काल होती रही कार्रवाई..

बरेली, 8 अगस्त। नाथ नगरी बरेली ने शनिवार को एक बार फिर देश-दुनिया के सामने अपनी गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की ऐसी तस्वीर पेश की, जिसने शहर की पहचान को और मजबूत कर दिया। एक ओर उर्स-ए-रजवी में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे लाखों जायरीन आला हजरत की मोहब्बत में सदाएं बुलंद कर रहे थे, तो दूसरी ओर सावन की कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्तों के जत्थे हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष के साथ शहर और जिले के विभिन्न मार्गों से गुजर रहे थे।

आस्था के दोनों रंग अलग थे, लेकिन संदेश एक था—एक-दूसरे की आस्था का सम्मान और शहर में अमन कायम रखना।

इसी सौहार्दपूर्ण माहौल के बीच पुलिस और प्रशासन ने जिस तरह उर्स और कांवड़ यात्रा को एक साथ संभाला, उसकी चर्चा आम लोगों के बीच भी रही। सिपाही से लेकर एडीजी तक अधिकारी सड़क पर दिखाई दिए। कमिश्नर से लेकर तहसीलदार तक प्रशासनिक अमला फील्ड में डटा रहा। अधिकारी लगातार रूट, भीड़ और यातायात व्यवस्था का जायजा लेते रहे। वहीं खुफिया विभाग और इंटेलिजेंस की टीमें भी लगातार सक्रिय रहीं और पल-पल की सूचनाएं वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाती रहीं।

शनिवार को आला हजरत का कुल शरीफ संपन्न होने के साथ उर्स का समापन हो गया। इसी दौरान कांवड़ियों के जत्थों का आवागमन भी लगातार जारी रहा। लाखों लोगों की आवाजाही के बावजूद दोनों धार्मिक आयोजनों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना पुलिस-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थी, जिसे व्यापक तैयारी, रूट डायवर्जन, बैरिकेडिंग, तकनीक और लगातार फील्ड मॉनिटरिंग के जरिए संभाला गया।

एडीजी से लेकर सिपाही तक सड़क पर रहा पुलिस-प्रशासन..

इस बार सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों और कंट्रोल रूम तक सीमित नहीं रही। वरिष्ठ अधिकारी खुद सड़क पर उतरकर व्यवस्थाओं को परखते नजर आए।

एडीजी जोन रमित शर्मा, मंडलायुक्त शंभू कुमार, डीआईजी अजय कुमार साहनी, जिलाधिकारी अविनाश सिंह, एसएसपी अनुराग आर्य, एसपी सिटी मानुष पारीख, एसपी साउथ आंशिक वर्मा और एसपी ट्रैफिक अकमल खान समेत पुलिस एवं प्रशासन के तमाम अधिकारी लगातार फील्ड में सक्रिय रहे।

चौकी चौराहा, पटेल चौक, बिहारीपुर, सिविल लाइंस और उर्स से जुड़े प्रमुख मार्गों के अलावा संवेदनशील स्थानों पर अधिकारी लगातार पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे।

कहीं भीड़ बढ़ी तो तत्काल उसे नियंत्रित किया गया। कहीं यातायात का दबाव बढ़ा तो रूट को व्यवस्थित किया गया। कहीं लोगों के सड़क पर अधिक संख्या में एकत्र होने की सूचना मिली तो पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली।

चुपके-चुपके पहरा देती रही पुलिस

पूरे आयोजन के दौरान पुलिस की रणनीति सिर्फ दिखाई देने वाली तैनाती तक सीमित नहीं थी। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में भी निगरानी करते रहे। संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों पर पुलिस की नजर बनी रही।

खुफिया विभाग और इंटेलिजेंस की टीमें भी लगातार सक्रिय रहीं। भीड़ की स्थिति, आवागमन, संभावित संवेदनशील स्थानों और किसी भी अप्रिय स्थिति की संभावना से संबंधित सूचनाएं वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जाती रहीं।

अधिकारियों को मिलने वाली फील्ड रिपोर्ट के आधार पर मौके पर तैनात पुलिस बल को तत्काल आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते रहे। यही वजह रही कि किसी भी छोटी स्थिति को बड़ा बनने का मौका नहीं मिला।

इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से सड़क तक हर गतिविधि पर नजर

सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक का भी व्यापक इस्तेमाल किया गया। पुलिस लाइन स्थित इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से उर्स और कांवड़ यात्रा से जुड़े प्रमुख मार्गों की लगातार निगरानी की गई।

सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड के माध्यम से भीड़ की स्थिति पर नजर रखी गई। जहां भी भीड़ का दबाव बढ़ा, वहां कंट्रोल रूम से संबंधित अधिकारियों को तत्काल अलर्ट किया गया।

कुछ स्थानों पर लोग ऊंचे स्थानों पर चढ़ गए या सड़क पर भीड़ बढ़ने लगी तो पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से तत्काल अनाउंसमेंट कराया गया। लोगों से व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ने की अपील की गई और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को भीड़ को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए।

इस व्यवस्था ने पुलिस को किसी भी स्थान पर पैदा हो रही स्थिति की जानकारी समय रहते उपलब्ध कराई।

बैरिकेडिंग ने संभाला रास्तों का दबाव

उर्स और कांवड़ यात्रा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यातायात प्रबंधन की थी। एक ओर बड़ी संख्या में जायरीन उर्स में पहुंच रहे थे तो दूसरी ओर कांवड़ियों के जत्थे लगातार अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे।

एसपी ट्रैफिक अकमल खान के नेतृत्व में यातायात पुलिस ने प्रमुख मार्गों और चौराहों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था संभाली। पैदल श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग तरीके से नियंत्रित किया गया।

जिन स्थानों पर दोनों आयोजनों से जुड़ी भीड़ एक-दूसरे के नजदीक आ रही थी, वहां पुलिस ने रूट मैनेजमेंट के जरिए आवागमन को व्यवस्थित रखा।

यातायात पुलिस की कोशिश रही कि धार्मिक आयोजनों में शामिल श्रद्धालुओं के साथ-साथ आम लोगों को भी कम से कम परेशानी हो।

डीएम और एसएसपी ने खुद सड़क पर किया पैदल भ्रमण

जिलाधिकारी अविनाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने पुलिस एवं प्रशासनिक टीम के साथ कई इलाकों में पैदल भ्रमण कर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था का जायजा लिया।

दोनों अधिकारियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से फीडबैक लिया और उन्हें पूरी सतर्कता के साथ ड्यूटी करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं के साथ संयम और संवेदनशीलता से पेश आने पर भी जोर दिया।

पैदल भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने यह भी देखा कि कहीं भीड़ के कारण सड़क या पैदल मार्ग बाधित तो नहीं हो रहा है। जहां आवश्यकता महसूस हुई, वहां तत्काल व्यवस्थाओं में बदलाव कराया गया।

कमिश्नर से तहसीलदार तक मैदान में

इस बार पुलिस के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की भी व्यापक तैनाती रही। मंडलायुक्त शंभू कुमार से लेकर जिला और तहसील स्तर के अधिकारी लगातार फील्ड में सक्रिय रहे।

अधिकारियों की जिम्मेदारी सिर्फ अपने-अपने कार्यालयों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे सड़कों पर उतरकर व्यवस्थाओं को देखते और अधीनस्थ अधिकारियों से लगातार रिपोर्ट लेते रहे।

वरिष्ठ अधिकारियों की लगातार मौजूदगी का असर निचले स्तर की व्यवस्था पर भी दिखाई दिया। सिपाही से लेकर निरीक्षक और क्षेत्राधिकारी तक अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहे।

कांवड़ियों और जायरीनों ने भी दिया सौहार्द का संदेश

पुलिस-प्रशासन की व्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों और श्रद्धालुओं के सहयोग ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कई स्थानों पर कांवड़ियों के जत्थे और उर्स में शामिल जायरीन एक ही क्षेत्र से गुजरे, लेकिन दोनों ओर से संयम और सहयोग का परिचय दिया गया। कांवड़ियों के गुजरने के दौरान कई जगह जायरीनों ने रास्ता खाली किया तो दूसरी ओर कांवड़ यात्रा के मार्ग में भी लोगों ने सहयोग किया।

कहीं पुष्पवर्षा से स्वागत हुआ तो कहीं एक-दूसरे के लिए रास्ता छोड़कर आपसी सम्मान का संदेश दिया गया।

यह दृश्य बरेली के उस सामाजिक ताने-बाने की तस्वीर बन गया, जहां अलग-अलग आस्थाओं के लोग एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए साथ आगे बढ़ते हैं।

उर्स में पहली बार शाकाहारी भोजन की पहल

इस बार उर्स-ए-रजवी के दौरान सावन और कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए शाकाहारी भोजन परोसने की व्यवस्था भी चर्चा में रही।

इस पहल के पीछे संदेश यही रहा कि अपनी धार्मिक परंपराओं और आस्था का पालन करते हुए दूसरे समुदाय की धार्मिक भावनाओं का भी सम्मान किया जाए।

शहर में शनिवार को इसका असर भी दिखाई दिया। उर्स में आने वाले जायरीन और कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालु कई स्थानों पर एक-दूसरे के आसपास से गुजरते रहे, लेकिन माहौल में किसी तरह का तनाव दिखाई नहीं दिया।

जनता ने सराही ट्रैफिक व्यवस्था

उर्स और कांवड़ यात्रा के कारण शहर में भीड़ का दबाव सामान्य दिनों की अपेक्षा काफी अधिक रहा। इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस की रूट डायवर्जन, बैरिकेडिंग और चौराहों पर तैनाती की व्यवस्था को लोगों ने सराहा।

आम लोगों के बीच यह चर्चा रही कि इतने बड़े आयोजनों के एक साथ होने के बावजूद पुलिस ने जिस तरह यातायात को नियंत्रित रखा, उससे लोगों को अपेक्षाकृत कम परेशानी हुई।

पुलिसकर्मियों ने कई घंटे लगातार सड़क पर खड़े रहकर यातायात को नियंत्रित किया। गर्मी, भीड़ और लगातार ड्यूटी के बावजूद जवान अपने प्वाइंट पर मुस्तैद रहे।

पल-पल की निगरानी ने नहीं बिगड़ने दिया माहौल

उर्स और कांवड़ यात्रा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण रणनीति रही—स्थिति पर लगातार नजर और तत्काल निर्णय।

पुलिस अधिकारियों के पास फील्ड से लगातार सूचनाएं पहुंचती रहीं। कंट्रोल रूम, सीसीटीवी, खुफिया तंत्र, स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच लगातार समन्वय बना रहा।

भीड़ बढ़ने से पहले पुलिस को सूचना मिल जाती थी और उसी के अनुरूप मौके पर बल बढ़ाया जाता या यातायात को दूसरी दिशा में मोड़ा जाता।

इस समन्वित रणनीति का परिणाम रहा कि शनिवार को दोनों बड़े धार्मिक आयोजनों के बीच किसी बड़े विवाद या अप्रिय घटना की स्थिति नहीं बनी।

शांति से कार्यक्रम निपटने के बाद पुलिस-प्रशासन ने ली राहत की सांस

आला हजरत का कुल शरीफ संपन्न होने और उर्स के समापन के साथ पुलिस-प्रशासन ने राहत की सांस ली। कई दिनों से चल रही तैयारियों, बैठकों, रूट प्लानिंग और सुरक्षा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण चरण शनिवार को पूरा हुआ।

इस दौरान पुलिस और प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ लाखों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की नहीं थी, बल्कि एक ही समय में दो बड़े धार्मिक आयोजनों को इस तरह संचालित करना था कि आम जनजीवन भी प्रभावित न हो और दोनों समुदायों की धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान बना रहे।

बरेली ने इस परीक्षा में एक बार फिर अपने सौहार्दपूर्ण चरित्र को सामने रखा।

बरेली ने लिखी मोहब्बत की नई इबारत

शनिवार को शहर की सड़कों पर एक तरफ हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष सुनाई दिए तो दूसरी ओर आला हजरत की सदाएं गूंजती रहीं।

आस्था के दो रंगों के बीच मोहब्बत और भाईचारे की तस्वीर दिखाई दी। कांवड़ियों और जायरीनों ने एक-दूसरे को रास्ता दिया, पुलिस ने दोनों के मार्गों को सुरक्षित रखा और प्रशासन ने लगातार समन्वय बनाए रखा।

बरेली की सड़कों से निकला यह संदेश सिर्फ एक दिन की व्यवस्था नहीं, बल्कि शहर की उस साझा संस्कृति की तस्वीर रहा, जिसमें अलग-अलग धार्मिक आस्थाएं एक-दूसरे का सम्मान करते हुए साथ चलती हैं।

कुल मिलाकर, सिपाही से लेकर एडीजी तक और तहसील स्तर के अधिकारी से लेकर मंडलायुक्त तक जिस तरह फील्ड में डटे रहे, खुफिया तंत्र ने जिस तरह पल-पल की सूचनाएं साझा कीं और आम जनता व श्रद्धालुओं ने जिस तरह प्रशासन का सहयोग किया, उससे आला हजरत का उर्स और कांवड़ यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। बरेली ने एक बार फिर साबित किया कि आस्था अलग हो सकती है, लेकिन मोहब्बत और भाईचारा साझा हो सकता है।