बदायूं। टीईटी परीक्षा के दौरान शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। ट्रैफिक प्रभारी की लापरवाही के कारण गुरुवार को शहर जाम से जूझता रहा। लवेलाचौक,रोड़वेज स्टैंड से लेकर, पुलिस लाइन,इंद्रा चौक चौराहे पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे न सिर्फ आम जनता बल्कि परीक्षा देने आए हजारों अभ्यर्थियों को भी भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
ट्रैफिक पुलिस के दावा,हकीकत में फेल
शहरवासियों का आरोप है कि हर बड़ी परीक्षा और विशेष अवसर पर प्रशासन ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर ये योजनाएं पूरी तरह विफल साबित होती हैं। टीईटी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा को लेकर भी ट्रैफिक पुलिस का कोई पुख्ता प्लान नजर नहीं आया। शहर के एंट्री पॉइंट्स से लेकर परीक्षा केंद्रों के बाहर तक गाड़ियां रेंगती रहीं।
जनता का फूटा गुस्सा, बोले- ‘पहले क्यों नहीं चेता महकमा?’

गुस्साए लोगों और परीक्षार्थियों का कहना है कि अगर ट्रैफिक पुलिस ने पहले से रूट डायवर्जन, वैकल्पिक पार्किंग व्यवस्था और संवेदनशील चौराहों पर अतिरिक्त ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती की होती, तो इतनी बड़ी अव्यवस्था पैदा ही नहीं होती। चंद पुलिसकर्मियों के भरोसे पूरे शहर की यातायात व्यवस्था को छोड़ दिया गया, जो मूकदर्शक बने तमाशा देखते रहे।
जाम का सबसे बुरा असर परीक्षा देने आए युवाओं पर पड़ा। ऑटो, बसों और निजी वाहनों में फंसे परीक्षार्थी समय से केंद्र पहुंचने के लिए तड़पते दिखे। कई केंद्रों पर अभ्यर्थी दौड़ते-भागते और रोते-बिलखते पहुंचे। आम जनता और युवाओं ने अब प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसे बड़े आयोजनों के लिए पहले से ही एक प्रभावी और सख्त ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाए, ताकि किसी का भविष्य इस लापरवाही की भेंट न चढ़े।