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आरोपियों को बचाने का खेल खत्म, पीड़ित महिला को मिला न्याय का भरोसा, पुलिस की थ्योरी फेल

बदायूं। सहसवान थाना क्षेत्र के गांव परसौना में बेजुबान कबूतरों को बेरहमी से मौत के घाट उतारने के मामले में आखिरकार कानून का डंडा चल गया है। स्थानीय पुलिस द्वारा मामले को रफा-दफा करने और आरोपियों को संरक्षण देने के तमाम कथित प्रयासों पर पानी फिर गया है। पीड़िता की शिकायत को लगातार नजरअंदाज कर रही सहसवान पुलिस को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के कड़े रुख के बाद बैकफुट पर आना पड़ा और अंततः नामजद आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

क्या था पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, परसौना निवासी अम्बरवती पत्नी मोरपाल ने अपने घर में पालतू कबूतर पाल रखे थे। बीती 29 मई की रात को गांव के ही दबंग किस्म के पड़ोसी उनके घर में घुस आए और रंजिश के तहत कबूतरों की गर्दन मरोड़कर उन्हें बेरहमी से मार डाला। सुबह जब पीड़िता ने मृत कबूतरों को देखा और विरोध किया, तो आरोपियों ने उनके साथ गाली-गलौज कर मारपीट की और गला दबाकर जान से मारने की धमकी दी।
पुलिस के रवैये पर उठे थे गंभीर सवाल
घटना के बाद पीड़ित महिला न्याय की आस में मृत कबूतरों के शवों को लेकर सहसवान थाने पहुंची थी। आरोप है कि वहां तैनात दरोगा रोहित ने पीड़िता की बात सुनने के बजाय उसे ही डांटकर और अभद्र भाषा का प्रयोग कर थाने से भगा दिया। पुलिस ने बिना किसी पोस्टमार्टम या जांच के ही कबूतरों की मौत को सामान्य बताकर अपनी मनगढ़ंत कहानी तैयार कर ली थी। न्याय न मिलने पर लाचार महिला तीन दिनों तक बेजुबानों के शवों को लेकर न्याय के इंतजार में बैठी रही, जिससे पुलिस की संवेदनशीलता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।

एसएसपी की चौखट पर पहुंची पीड़िता, तब बदला रुख
जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़िता ने मुख्यालय जाकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की और शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई। मामले की गंभीरता और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के उल्लंघन को देखते हुए एसएसपी ने सहसवान पुलिस को तत्काल कड़ी फटकार लगाई और एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।

इनके खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

एसएसपी के आदेश के बाद पुलिस ने परसौना निवासी नामजद आरोपियों धर्म सिंह पुत्र उमराय, राधे पुत्र जगदीश और गोविन्द्र पुत्र छत्रपाल के खिलाफ घर में घुसने, मारपीट करने, जान से मारने की धमकी देने और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।