बदायूं। इस्लामनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र इन दिनों बिना पंजीकरण और मानक विहीन चल रहे निजी अस्पतालों का सबसे बड़ा गढ़ बन चुका है। कस्बा सहित ग्रामीण इलाकों की गलियों में खुले ये अस्पताल ‘इलाज’ के नाम पर सीधे तौर पर मौत का व्यापार कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि इन अवैध अड्डों की सूची और शिकायतें बार-बार अधिकारियों की मेज तक पहुंचती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल सन्नाटा पसरा रहता है। स्थानीय सूत्रों और विश्वसनीय दावों के अनुसार, इस पूरे खेल के पीछे स्वास्थ्य विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों को मिलने वाली मोटी ‘गुरु दक्षिणा’ (मासिक बंधी रकम) है, जिसके रसूख के आगे मरीजों की जिंदगी और सरकारी नियम-कानून पूरी तरह बौने साबित हो रहे हैं।
महीने की ‘फिक्स बंधी’ ने ठप की स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और दबे सुरों में बात करने वाले विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि इस्लामनगर क्षेत्र के इन फर्जी क्लिनिक और नर्सिंग होम संचालकों ने अधिकारियों से ‘सुरक्षा कवच’ खरीद रखा है। हर महीने तय तारीख पर एक बड़ी रकम (सुविधा शुल्क) कथित रूप से जिम्मेदार नुमाइंदों तक पहुंचा दी जाती है। यही कारण है कि जब भी उच्च स्तर से या शासन की सख्ती पर कोई टीम क्षेत्र में निरीक्षण के लिए आती है, तो इसकी भनक पहले ही अस्पताल संचालकों को लग जाती है। टीम के पहुंचने से आधा घंटा पहले ही अस्पतालों के शटर गिर जाते हैं और कागजी खानापूर्ति कर टीम वापस लौट जाती है।
ओटी से लेकर लेबर रुम तक सब अवैध, भगवान भरोसे जनता की सांसें
इस्लामनगर सीएससी के दायरे में आने वाले दर्जनों फर्जी अस्पताल चल रहे इन अस्पतालों की हकीकत बेहद डरावनी है।अवैध ऑपरेशन थियेटर बिना किसी वैध डिग्री के, बीएचएमएस या बीएएमएस पास और कई बार तो सिर्फ कंपाउंडर ही धड़ल्ले से पेट के बड़े ऑपरेशन (सर्जरी) और सिजेरियन प्रसव कर रहे हैं।
मानकों की धज्जियां
इन भवनों के पास न तो फायर विभाग की एनओसी है, न प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का सर्टिफिकेट और न ही बायो-मेडिकल वेस्ट (अस्पताल के कचरे) के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है।
दवाइयों का अवैध स्टॉक
क्षेत्र में सेंटरों के अंदर बिना ड्रग लाइसेंस के भारी मात्रा में प्रतिबंधित और नशीली दवाइयों का स्टॉक रखा जाता है, जिसका इस्तेमाल मरीजों को बेहोश करने या अवैध गर्भपात के लिए किया जाता है।
जब तक लाश नहीं गिरती, तब तक फाइल नहीं खुलती
क्षेत्रीय जनता का सबसे बड़ा आरोप यह है कि स्वास्थ्य विभाग का ‘हंटर’ तभी निकलता है। जब कोई अप्रिय घटना हो जाती है। कुछ समय पूर्व हुई घटनाओं पर एक नजर डालते है।
मौर्य हेल्थ केयर सेंटर को हाल ही में सील कर दिया है। इस अवैध क्लिनिक में गलत इलाज और गैर-कानूनी गर्भपात के कारण एक महिला की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इसे तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया।
न्यू अपोलो अस्पताल नवादा बिना पंजीकरण चल रहे इस अस्पताल में मरीज के गलत इलाज का मामला सामने आने पर पंजीकरण सेल अधिकारी ने इसे सील करने का नोटिस जारी किया।
कादरचौक में पंजीकरण के नियमों के उल्लंघन हुआ एमबीबीएस के नाम पर पंजीकरण कराकर बीएएमएस डॉक्टरों द्वारा संचालन के कारण यहां के ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया गया।
बिनावर क्षेत्र में अवैध क्लीनिक: एसीएमओ की टीम ने बिना पंजीकरण घर में चल रहे शशिवाला प्रसव केंद्र सहित दो अवैध क्लीनिकों को रंगे हाथों पकड़कर सील किया।
जब किसी मरीज की गलत इलाज या घोर लापरवाही के कारण मौत हो जाती है और परिजन शव को सड़क पर रखकर हंगामा शुरू कर देते हैं। तब भी विभाग केवल उस एक विशिष्ट अस्पताल को सील कर अपनी पीठ थपथपा लेता है, जबकि उसके ठीक अगल-बगल में चल रहे अन्य पांच अवैध क्लीनिकों की तरफ मुड़कर भी नहीं देखा जाता। कुछ महीनों बाद, माहौल शांत होते ही सील किए गए अस्पताल भी सांठगांठ के जरिए या तो नए नाम का बोर्ड लटकाकर या गुपचुप तरीके से दोबारा खोल दिए जाते हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश, सीधे शासन को भेजी जा रही है खुफिया रिपोर्ट
इस्लामनगर और आसपास के ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अब जिले के अधिकारियों पर भरोसा जताने के बजाय सीधे मुख्यमंत्री पोर्टल, बरेली मंडल के कमिश्नर और लखनऊ स्वास्थ्य महानिदेशालय को साक्ष्यों के साथ गुप्त शिकायतें भेजना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक भ्रष्टाचार की इस ‘गुरु दक्षिणा’ संस्कृति पर चोट नहीं की जाएगी और सांठगांठ करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस्लामनगर के गरीब मरीजों को इन झोलाछाप ‘यमदूतों’ के चंगुल से नहीं बचाया जा सकता।
इस संबंध में सीएचसी प्रभारी डॉ रोहित कुमार से जानकारी लेनी चाहिए उन्होंने ने फोन नहीं उठाया।