फर्जी परमिशन की आड़ में ‘मिट्टी का काला खेल’: खनन माफिया और विभाग की सांठगांठ का बड़ा खुलासा

अफसर मौन, माफिया बेखौफ: फर्जी कागजों के दम पर धड़ल्ले से चल रहा अवैध मिट्टी खनन

विभाग से सांठगांठ, कागजात फर्जी: नियम-कायदों को ठेंगा दिखा रात-दिन खोदी जा रही धरती

बदायूं। कुंवरगांव थाना क्षेत्र में इन दिनों अवैध खनन का कारोबार चरम पर है, जिसमें खनन विभाग के निजी कर्मचारी (प्राइवेट बाबू) और स्थानीय पुलिस के कुछ कर्मियों की कथित मिलीभगत सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार, कुंवरगांव थाना क्षेत्र में खनन विभाग के एक बाबू और उनके द्वारा तैनात एक प्राइवेट युवक मिलकर फर्जी परमिशन के जरिए खनन माफियाओं से मोटी रकम वसूल रहे हैं। इसके बदले में माफिया बेखौफ होकर ट्रैक्टर-ट्रॉली से धड़ल्ले से मिट्टी बेच रहे हैं।

इन गांवों में चल रहा अवैध खेल—

प्रशासन के सख्त निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए कुंवरगांव थाना क्षेत्र के चकोलर, बादल, औरंगाबाद खालसा, इमलिया, कैली, बनेई, और कसेर सहित दर्जनों गांवों में रात-दिन मिट्टी का अवैध खनन जारी है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खनन विभाग और पुलिस अधिकारियों की सांठगांठ के चलते माफिया धरती का सीना छलनी कर रहे हैं।

मलाई’ का खेल: निजी कर्मचारी और पुलिस ड्राइवर की अहम भूमिका

सूत्रों की जानकारी के अनुसार, खनन विभाग के ऑफिस में तैनात प्राइवेट बाबू द्वारा खनन माफियाओं की बात सीधे अधिकारियों से कराई जाती है। सूत्रों का दावा है कि ऑफिस में एक अन्य प्राइवेट युवक ऑनलाइन के नाम पर माफियाओं से फर्जी दस्तावेज लेकर अवैध परमिशन जारी कर रहा है। कथित परमिशन की एवज में बाबू प्रति परमिशन 3 से 4 हजार रुपए वसूलता है।वहीं, स्थानीय पुलिस भी पीछे नहीं है। थाने का ड्राइवर और एक सिपाही खनन माफियाओं से ‘गुरु दक्षिणा’ लेकर क्षेत्र में अवैध मिट्टी के कारोबार को निर्बाध चलने की अनुमति देते हैं।

पर्यावरण और सड़कों को भारी नुकसान—

अंधाधुंध खनन से न केवल सरकारी राजस्व को चपत लग रही है, बल्कि कृषि योग्य भूमि और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। भारी भरकम ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर के चलने से गांव की सड़कें टूट चुकी हैं और हादसों का डर बना रहता है। स्थानीय लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब भी इस अवैध धंधे के खिलाफ आवाज उठाई जाती है, माफिया अपने रसूख का डर दिखाकर चुप करा देते हैं।

ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग–
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेते हुए दोषी अधिकारी, कर्मचारी और पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर यह ‘लेन-देन’ बंद नहीं हुआ, तो क्षेत्र में उपजाऊ जमीनें बंजर हो जाएंगी।

खतौनी की जांच:

मौके पर की जा रही खनन वाली जमीन (खेत) खतौनी में किसके नाम है? क्या किसान ने स्वयं की भूमि और भराव करने के लिए आवेदन किया है? (मिट्टी कहां पड़ रही है?): परमिशन में निर्धारित स्थान पर ही मिट्टी डाली जा रही है या उसे व्यावसायिक रूप से बेचा जा रहा है? यदि तहसील प्रशासन के द्वारा जांच होती है तो बाबू और खनन अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाएंगे।