बरेली में रविवार की सुबह पुलिस लाइन का माहौल गर्व, अनुशासन और उत्साह से भरा नजर आया, जब नौ महीने की कठिन ट्रेनिंग पूरी कर 783 महिला रंगरूटों ने पासिंग आउट परेड में हिस्सा लेकर सिपाही के रूप में अपनी नई पहचान हासिल की। यह सिर्फ एक परेड नहीं, बल्कि उन सपनों का सच होना था, जिनके लिए इन युवतियों ने कड़ी मेहनत, त्याग और समर्पण दिखाया।


भव्य परेड समारोह के मुख्य अतिथि रमित शर्मा रहे, जिन्होंने परेड की सलामी ली और नव नियुक्त सिपाहियों को कर्तव्य, निष्ठा और अनुशासन के महत्व को समझाया। उनके साथ अनुराग आर्य भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने अपने संबोधन में साफ कहा कि पुलिस की वर्दी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही और सेवा का संकल्प भी है।


आरआई हरमीत सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस लाइन को 800 महिला रंगरूटों का आवंटन मिला था, जिनमें से 796 ने ज्वाइन किया। प्रशिक्षण के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने अन्य सेवाओं में चयन या निजी कारणों से बीच में ही प्रशिक्षण छोड़ दिया। अंततः 783 महिला रंगरूटों ने सफलतापूर्वक ट्रेनिंग पूरी की, जिनमें से 292 को बरेली जिले के विभिन्न थानों में तैनात किया जाएगा।


परेड के बाद का दृश्य भावनात्मक और उत्सवपूर्ण रहा। नई महिला सिपाहियों ने अपने माता-पिता को पगड़ी पहनाकर सम्मान दिया, उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और पगड़ी उछालकर अपनी सफलता का जश्न मनाया। खास बात यह रही कि इनमें से अधिकतर रंगरूट साधारण और मध्यमवर्गीय परिवारों से आती हैं, जिनके लिए यह उपलब्धि किसी सपने के पूरे होने से कम नहीं थी।


भीषण गर्मी के बावजूद परेड के दौरान अनुशासन, तालमेल और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। हर कदम पर उनकी मेहनत और लगन दिखाई दी। नव नियुक्त सिपाहियों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और प्रशिक्षण अधिकारियों को दिया।
इसी के साथ प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी की आठवीं बटालियन में भी पासिंग आउट परेड आयोजित की गई। यहां मुख्य अतिथि मोदक राजेश डी राव ने सलामी ली और कमांडेंट आकाश तोमर के साथ परेड का निरीक्षण किया। कुल 400 में से 394 रंगरूटों ने आमद दर्ज कराई थी, जिनमें से 364 ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा कर सिपाही का दर्जा हासिल किया।


समारोह के अंत में सभी प्रशिक्षुओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए और उन्हें प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनाती के लिए रवाना किया गया। यह दिन न केवल इन जवानों के लिए, बल्कि उनके परिवारों और पूरे समाज के लिए गर्व का प्रतीक बन गया—जहां बेटियों ने वर्दी पहनकर सेवा, सुरक्षा और सम्मान की नई मिसाल कायम की।