सरकार का नारा है बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ, साथ ही सब पढ़े सब बढ़े

लेकिन इन सब बातों को खंडित करते हुए स्कूल ने एक बच्ची की जाती पूछ कर उसको एडमिशन करने से मना कर दिया

दरअसल यह मामला है जिला बदायूं के तहसील सहसवान मुजरिया थाना क्षेत्र में आने वाले ग्राम चतुरी नगला में रहने वाली संजना बाल्मीकि का है।संजना वाल्मीकि के पिता बीते साल एडमिशन के समय कमाने खाने के लिए शहर चले गए थे एडमिशन कराने के लिए संजना वाल्मीकि अपनी मां सीमा वाल्मीकि के साथ स्कूल गई थी।

स्कूल का नाम संविलियन विद्यालय जोरापार वाला उझानी बदायूँ, जो पास ही के गांव ज्योरा मैं स्थित

हैसंजना की पढ़ाई का एक साल खराब होने के बाद ,इस बार संजना फिर से अपनी मां से एडमिशन कराने के लिए बोली सीमा वाल्मीकि अपनी बेटी, संजना बाल्मीकि को लेकर फिर से स्कूल पहुंच गई।फिर होना क्या था स्कूल के टीचरों ने पहले संजना से उसका गांव पूछा फिर उसकी जाति पूछी फिर उसको एडमिशन देने से मना कर दिया।फिर संजना अपने पिता जयकिशन के साथ स्कूल पहुंची तो उन्हें भी बातें बताकर वापस भेज दिया और बच्ची का नाम नहीं लिखा गया।

क्या एक दलित बच्ची का शिक्षा लेने का अधिकार ऐसे ही कुचल दिया जाएगा।

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