
एसएनसीयू में रात में कोई डॉक्टर नहीं रहता तैनात
बदायूं। जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड (स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट) में सिस्टम की लापरवाही की वजह से शनिवार की सुबह इलाज के दौरान तीन नवजातों ने दम तोड़ दिया।बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। तीनों नवजात को पांच जून को भर्ती कराया था।चिकित्सकों के मुताबिक तीनों नवजात का वजन काफी कम था।नवजात की मौत के बाद स्टाफ में खलबली मच गई।

रेनू पत्नी विपिन की पांच जून को सीएचसी समरेर में डिलीवरी हुई थी उसने जुड़वा बेटों का जन्म दिया था हालत गंभीर होने पर जुड़वा बच्चों को महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में पांच जून को भर्ती कराया गया था। सीपैप मशीन की सुविधा न होने की वजह से इलाज के दौरान जुड़वां बच्चों का मौत हो गई।
दातागंज के क्षेत्र के गांव जयपालपुर निवासी प्रेमलता पत्नी धर्मपाल को प्रसव पीड़ा होने पर महिला अस्पताल में 5 जून के लिए भर्ती कराया था जिसकी शनिवार की सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई,चिकित्सकों के मुताबिक मौत की वजह वजन कम होना बताया जा रहा है।

एसएनसीयू नोडल डॉ संदीप वार्ष्णेय ने बताया कि जो नवजात भर्ती हुए थे उनका पहले से ही वजन कम था। हमारे यहां सीपैप मशीन है लेकिन वह चेंज होनी है न्यू वॉर्न मोड वाले सीपैप और वेंटिलेटर की सुविधा नहीं होने की वजह से गंभीर नवजात शिशुओं का इलाज संभव नही हो पा रहा है। भर्ती नवजात की हालत पहले ही खराब हो रखी थी जब हमारे यहां भर्ती होने के लिए आया तो उसकी हालात सीरियस थी स्टाफ ने परिजनों से रेफर ले जाने के लिए कहा तो उन्होंने नवजात को ले जाने से इंकार कर दिया।

एसएनसीयू में रात में कोई डॉक्टर नहीं रहता तैनात
जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में रात में कोई डॉक्टर तैनात नहीं रहता है, जिससे नवजातों को 12 घंटे तक डॉक्टरों का उपचार नहीं मिलता है।केवल स्टाफ नर्स के भरोसे ही नवजातों का इलाज होता है। इस कमी के कारण, रात में बच्चों की मृत्यु दर में वृद्धि हो रही है।
यह स्थिति एसएनसीयू में डॉक्टरों की कमी के कारण उत्पन्न हो रही है। महिला अस्पताल में केवल दो डॉक्टर हैं जो एसएनसीयू में ड्यूटी करते हैं। इसका खामियाजा नवजात शिशुओं को भुगतना पड़ता है।






