सहसबान- यूं तो स्वीमिंग पूल के निर्माण का उद्देश्य अच्छे तैराक खिलाड़ी तैयार करना है। इसके लिए प्रशिक्षक तथा फिलट्रेशन प्लांट लगाना जरूरी है, लेकिन जनपद में ऐसा नहीं है। जिले में व्यावसायिक रूप से सैकड़ों स्वीमिंग पूल संचालित हैं, लेकिन कुछ ही स्वीमिंग पूलो की अनुमति ही है ।ज्यादातर मानकों के विपरीत चल रहे हैं। इन स्वीमिंग पूल में रोजाना लाखों क्यूसेक लीटर पानी बर्बाद हो रहा है लेकिन जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इसी के साथ सुरक्षा के मानकों का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। ऐसे में यहां अनहोनी होने की आशंका भी रहती है।
स्वीमिंग पूल निर्माण और संचालन के लिए लेनी होती है अनुमति
स्वीमिंग पूल निर्माण करने के लिए जिला क्रीड़ा अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग और एसडीएम की अनुमति लेनी आवश्यक होती है। जिला क्रीड़ा अधिकारी के गाइडलाइन के अनुसार ओलंपिक स्वीमिंग पूल की चौड़ाई 25 फीट और लंबाई 50 फीट होती है, जबकि सब स्टैंर्ड स्वीमिंग पूल की 12.5 फीट चौड़ाई और 25 फीट लंबाई होनी चाहिए। नियमों को दरकिनार कर कुछ लोगों ने मात्र व्यावसायिक रूप से गर्मी से निजात दिलाने और नहाने के लिए स्वीमिंग पूल का निर्माण कराया है। इनकी गहराई और लंबाई भी मानकों के विपरीत है। जिसके चलते हादसा होने की संभावना बनी रहती है।
