राजनैतिक दबाव के चलते नहीं मिल रहा पीड़ित को न्याय
बदायूँ जनपद के दातागंज क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक पीड़ित भाई, अपने मृतक भाई प्रकाश चंद्र की अस्थियां लेकर दर-दर न्याय की गुहार लगा रहा है। यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का आईना है।
आरोप है कि मृतक प्रकाश चंद्र की जमीन का फर्जी बैनामा उनके ही सगे भाई छविराम की पत्नी राधिका देवी द्वारा, अलापुर निवासी नरेशपाल के नाम पर, प्रकाश चंद्र बनकर करा लिया। जब असली मालिक अपनी जमीन बेचने पहुंचे, तब उन्हें इस बड़े फर्जीवाड़े का पता चला।
पीड़ित ने न्याय के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, जिसके बाद 04 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 08 महीने तक पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की। आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत के चलते आरोपी खुलेआम घूमते रहे और लगातार पीड़ित पर केस वापस लेने का दबाव बनाते रहे।
इतना ही नहीं, जब पीड़ित पक्ष ने अपनी जमीन बेचने का प्रयास किया, तो दबंगों ने रजिस्ट्रार ऑफिस में घुसकर उनके प्रकाश चंद्र का अपहरण करने का प्रयास किया था, और गला दबाया और बेरहमी से मारपीट की। उसी बीच पुलिस मौके पर पहुंची, आरोपियों को पकड़ा भी गया, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते उन्हें थाने से ही छोड़ दिया गया।
इस मानसिक उत्पीड़न और प्रशासनिक लापरवाही ने आखिरकार एक निर्दोष व्यक्ति की जान ले ली — पीड़ित प्रकाश चंद्र की सदमे में हार्ट अटैक से मौत हो गई।
आज ओम सिंह अपने भाई की अस्थियां लेकर न्याय के लिए भटक रहे हैं — यह दृश्य किसी भी संवेदनशील समाज के लिए कलंक से कम नही है।
एक ओर सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर पुलिस प्रशासन की लापरवाही और राजनीतिक दल का दबाव न्याय की हत्या कर रहा हैं।