“सुरक्षित बालक, सशक्त नारी—विकसित भारत की तैयारी” के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से दृढ़ संकल्प संस्था द्वारा किशोर न्याय एवं महिला सशक्तिकरण के सामाजिक, कानूनी एवं मानवीय पहलुओं पर एक विचारोत्तेजक सेमिनार का आयोजन संस्था के कार्यालय, मधुबन कॉलोनी, बदायूं में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों का स्वागत पौधा भेंट कर किया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया गया।

कार्यक्रम की समन्वयक एडवोकेट वैशाली गुप्ता ने संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दृढ़ संकल्प संस्था की स्थापना वर्ष 2006 में सामाजिक चेतना, सेवा एवं जनकल्याण के उद्देश्य से की गई थी। संस्था द्वारा समय-समय पर सामाजिक विषयों पर गोष्ठियां, निःशुल्क चिकित्सा शिविर, जागरूकता अभियान, स्वच्छता कार्यक्रम एवं युवा कल्याण से जुड़े अनेक प्रयास किए जाते रहे हैं। किशोरों को सकारात्मक दिशा देना, नारी सुरक्षा व सशक्तिकरण को बढ़ावा देना तथा समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का विकास करना संस्था की मूल कार्यदिशा रही है।

मुख्य वक्ता श्री शिरीष मल्होत्रा, पूर्व अध्यक्ष एवं सदस्य, बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने कहा कि किशोरों में संस्कारों का विकास अत्यंत आवश्यक है। किशोरों एवं महिलाओं के लिए पर्याप्त कानूनी संरक्षण उपलब्ध है, आवश्यकता केवल जागरूकता की है। उन्होंने अभिभावकों से तकनीक के प्रति स्वयं को अपडेट रखने का आह्वान करते हुए कहा कि समाधान केवल कानून या भाषणों में नहीं, बल्कि संवेदनशील परिवार, उत्तरदायी शिक्षा और जागरूक समाज में निहित है।

पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक भारतीय ने माताओं से जीजाबाई की तरह सशक्त बनने का आह्वान किया। थाना मुजरिया प्रभारी ज्योति सिंह ने परिवार और बच्चों को समय देने पर जोर दिया। उसहैत के पूर्व चेयरमैन गौरव गुप्ता ‘गोल्डी’ ने किशोरों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता बताई।

किशोर न्याय बोर्ड के न्यायिक सदस्य अरविंद गुप्ता ने कहा कि किशोर और नारी समाज के दो मजबूत स्तंभ हैं। किशोर अपराध समाज के भविष्य और महिला अपराध समाज की आत्मा के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, अपेक्षाओं का दबाव, संवाद की कमी और मार्गदर्शन के अभाव में किशोर अपराध की ओर बढ़ते हैं, अतः उन्हें संवेदनशील, मित्रवत और सुधारात्मक दृष्टिकोण से समझना होगा।

बाल संरक्षण समिति की न्यायिक सदस्य सविता मालपानी ने बचपन से ही बच्चों में संस्कार देने की आवश्यकता बताई। समिति के न्यायिक सदस्य सुयोग्य गुप्ता ने किशोर अपराधों के लिए मोबाइल के दुरुपयोग को प्रमुख कारण बताते हुए प्रारंभिक स्तर पर मोबाइल नियंत्रण पर बल दिया।

बदायूं व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र ढींगरा ने कहा कि यदि आज किशोरों को सम्मान, दिशा और संवेदना दी जाए तो भविष्य में महिला अपराध स्वतः कम होंगे। डॉ. जयप्रकाश गुप्ता एवं ने बच्चों को मोबाइल से दूर रखने तथा महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को सशक्तिकरण का आधार बताया। अखिल भारतीय सनातन बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने किशोरियों को प्रतियोगिताओं के माध्यम से राष्ट्रीय हित से जोड़ने का आह्वान किया। युवा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष ध्रुव देव गुप्ता ने बच्चों व किशोरों को नशे से दूर रहने की सलाह दी।

एडवोकेट कुमार आशीष ने किशोरों एवं नारियों की शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों के समावेश पर बल देते हुए अपनी स्वरचित कविता के माध्यम से नारी की संवेदना और संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया—

“वक़्त के साथ चलती रहीं बेटियाँ,
कितने रिश्तों में ढलती रहीं बेटियाँ।
जिनके आँगन को खुशियों से रोशन किया,
उनकी आँखों में खलती रहीं बेटियाँ।
फ़र्ज़ को ख्वाहिशों से बड़ा मानकर,
हसरतों को कुचलती रहीं बेटियाँ।”

शासकीय अधिवक्ता संजीव कुमार गुप्ता ने किशोरों एवं महिलाओं के उत्थान हेतु प्रभावी कल्याणकारी योजनाओं के विकास की आवश्यकता पर बल दिया।

सेमिनार में पुलिस परामर्श केंद्र के काउंसलर ज्वाला प्रसाद गुप्ता, पूर्व जिला अध्यक्ष अधिवक्ता परिषद दिलीप गुप्ता, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिला अध्यक्ष सौरभ गुप्ता, पूर्व शासकीय अधिवक्ता एस.सी. गुप्ता सहित अनेक अधिवक्ताओं, समाजसेवियों एवं पत्रकार अंश गुप्ता ने भी अपने विचार व्यक्त किए।