
..माता-पिता को डिजिटल अरेस्ट से बचाने वाले आठवीं कक्षा के छात्र तन्मय को सम्मानित करते एडीजी जोन रमित शर्मा और एसएसपी बरेली अनुराग आर्य..
माता-पिता को डिजिटल अरेस्ट से बचाने वाले आठवीं कक्षा के छात्र तन्मय को बरेली पुलिस ने साइबर प्रहरी बनाया है। उनके माध्यम से वह स्कूलों, मुहल्लों व अन्य स्थानों पर लोगों में जागरुकता फैलाएंगे। उनके बताए हुए प्वाइंट्स और बनाई हुई पेंटिंग को भी बरेली पुलिस अपने एक्स हैंडल से पोस्ट करेगी। जिससे तन्मय की तरह अन्य लोग भी साइबर ठगों के चंगुल से किसी को बचा सकें।
शुक्रवार को एडीजी रमित शर्मा ने तन्मय व उनके माता-पिता को अपने कार्यालय में बुलाकर सम्मानित भी किया। प्रेमनगर के सुर्खा निवासी संजय कुमार सक्सेना एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। उनकी पत्नी भी एक निजी स्कूल में शिक्षक हैं। बेटा तन्मय आठवीं कक्षा का छात्र है।

अंजान नंबर से आया था फोन
सोमवार दोपहर करीब तीन बजे संजय के पास एक अंजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस से बात करना बताकर उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। कहा कि उनका नाम आतंकवादी संगठन से जुड़ा है। उनके नाम पर करोड़ों की फंडिंग की गई है।
इससे संजय और उनकी पत्नी दोनों घबरा गए, ठगों ने कहा कि उनके परिवार में कितने लोग हैं तो संजय ने कहा कि तीन लोग हैं इसके बाद तीनों को उन्होंने एकत्र होने को कहा। फिर उच्चाधिकारियों से बात करने की बात कहकर फंसाते रहे। साइबर ठगों ने करीब नौ घंटे तक उन्हें इसी तरह से वीडियो काल पर बंधक बनाकर रखा था।
डर से फोन नहीं काट रहे थे माता-पिता
साथ ही बैंक खातों से लेकर कैश, ज्वेलरी, एफडी, जमीन आदि सभी की जानकारी प्राप्त कर ली और ज्यादा धमकाने के लिए एक फर्जी वारंट भी भेज दिया। इस दौरान आठवीं कक्षा के तन्मय ने पिता से कई बार कहा कि यह ठग हैं और इनके चक्कर में न पड़ें। इनका फोन काट दें, लेकिन संजय डर की वजह से फोन नहीं काट रहे थे।
तन्मय में अपने तेज दिमाग से सबूत के तौर पर वीडियो काल के कुछ वीडियो क्लिप भी बना लिए। हालांकि, जब पिता ने फोन नहीं काटा तो तन्मय ने ही वीडियो काल को काटकर घर के सभी फोन को फ्लाइट मोड पर लगा दिया जिससे दोबारा काल न आ सके।

खातों को सुरक्षित करने का बताया तरीका
अगले दिन उन्होंने पुलिस को सूचना दी और पुलिस ने संजय के सभी खातों को और भी ज्यादा सुरक्षित करने के साथ ही उन्हें समझाया। तन्मय की होशियारी की वजह से माता-पिता के लाखों रुपये बचे तो पुलिस ने भी उनकी समझदारी का सम्मान किया।
शुक्रवार को एडीजी जोन रमित शर्मा ने तन्मय और उनके माता-पिता को अपने कार्यालय बुलाया और उन्हें सम्मानित किया। एडीजी ने तन्मय को एक वाइट बोर्ड, चाकलेट रेप पैक, ट्राइपोड समेत अन्य गिफ्ट दिए। साथ ही उनका उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वह बरेली साइबर पुलिस के साइबर प्रहरी हैं।
उन्होंने तन्मय से कहा कि वह अपने स्कूल, आस-पास के क्षेत्रों में इसी तरह से लोगों को जागरूक करें ताकि लोग साइबर ठगी का शिकार होने से बच सकें। इस मौके पर एसएसपी अनुराग आर्य, एसपी सिटी मानुष पारीक, एसपी ट्रैफिक अकमल खान, एडिशन एसपी पंकज श्रीवास्तव, सीओ सिटी आशुतोष शिवम आदि शामिल रहे।

गिफ्ट में मिले बोर्ड पर लिखने वाले बिंदुओं को करेंगे पोस्ट,
एडीजी रमित शर्मा का कहना हैं कि तन्मय को वाइट बोर्ड इसलिए दिया गया है ताकि उनके दिमाग में साइबर ठगी को लेकर जो भी आए वह उस बोर्ड पर लिख सकें। वह लोगों को जागरूक करने के लिए जो भी लिखेंगे या पेंटिंग बनाएंगे उसे पुलिस अपने आफिशियल एक्स हैंडल से भी पोस्ट करेगी।

न्यूज़ देखकर मिलती है बहुत जानकारी..
तन्यम का कहना है कि वह अखबार में छपने वाली खबरों के अलावा इंटरनेट मीडिया पर आने वाली सभी तरह की खबरों को काफी ध्यान से पढ़ते हैं। उनसे भी कई चीजें ऐसी मिलती हैं जिनसे उन्हें साइबर ठगों पैटर्न और उनसे बचने के तरीके के बारे में जानकारी मिलती है।
तन्मय ने अपनी समझदारी का काफी अच्छा परिचय दिया है। उन्होंने साइबर ठगों के जाल से अपने माता-पिता को बचाया है। उन्हें हमने साइबर पुलिस का प्रहरी बनाया है। जिससे और भी लोग तन्मय की तरह जागरूक हो सकें।