
बरेली। रामपुर रोड स्थित होटल कंफर्ट इन में चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री समिति के तत्वावधान में यूनियन बजट 2026 पर एक विस्तृत चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चैंबर अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने की। उन्होंने सभी सम्मानित वक्ताओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा बड़ी संख्या में उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के दौरान बजट का लाइव प्रसारण सभी सदस्यों द्वारा देखा गया। बजट में सरकार द्वारा एमएसएमई, केसीसी, बायो फॉर्मिंग, मेगा टेक्सटाइल पार्क, मछली पालन, दुग्ध परियोजनाएं, आयुर्वेद, विशेष रेल कॉरिडोर, जलमार्गों सहित कई क्षेत्रों के लिए बड़े प्रावधान किए जाने पर चर्चा हुई। इन प्रस्तावों को उद्योग एवं रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

चैंबर अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बजट में सरकार की देश को विकास की दिशा में आगे ले जाने की मंशा स्पष्ट रूप से झलकती है। इन योजनाओं से आने वाले समय में युवाओं और उद्यमियों को लाभ मिलेगा। हालांकि उन्होंने इनकम टैक्स से जुड़े प्रावधानों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पेनाल्टी के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई में दो वर्ष तक की जेल का प्रावधान व्यापारियों के लिए हतोत्साहित करने वाला है।

व्यापारियों ने एक स्वर में कहा कि दिन-रात मेहनत कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले व्यापारियों पर इस प्रकार के कठोर प्रावधान विकास विरोधी साबित हो सकते हैं। टैक्स देने वाला वर्ग यदि कारोबार बढ़ाने से बचेगा तो भविष्य में इसका असर सरकार के राजस्व पर भी पड़ेगा।

सदस्यों ने रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर अधिक निवेश की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि चीन, अमेरिका, रूस और इजरायल जैसे देश रिसर्च पर भारी निवेश कर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। भारत को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
महंगाई के अनुपात में इनकम टैक्स स्लैब न बढ़ाए जाने पर भी सवाल उठाए गए। व्यापारियों का कहना था कि इससे आम आदमी की क्रय शक्ति प्रभावित होती है और वह मुख्यधारा में शामिल होने से पीछे रह जाता है।
बजट में मेडिसिन निर्माण में छूट, 200 इंडस्ट्रियल क्लस्टर, एक जिला एक उत्पाद योजना, ग्राम स्वराज योजना, आयुर्वेद व बैटरी विकास के लिए तीन नए संस्थान खोलने जैसे प्रस्तावों को सकारात्मक बताया गया। हालांकि शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन-यापन और व्यापार संचालन से जुड़ी लागत में राहत देने के लिए और ठोस घोषणाओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

कार्यक्रम के अंत में व्यापारियों ने कहा कि यदि सरकार संतुलित नीति अपनाकर उद्यमियों को प्रोत्साहन दे, तो देश का समग्र विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति और मजबूत हो सकती है।