बदायूं। जिला पंचायत कैंपस में वित्तीय परामर्शदाता के कार्यालय का निर्माण किया जा रहा हैं। जिसमें कई परिवर्तन किए गए हैं सूत्रों बताते है ठेके पर बना रहे वित्तीय परामर्शदाता के कार्यालय के निर्माण में चोरी चुप्पा कई चीजों में परिवर्तन किया गया है। वित्तीय परामर्शदाता का एक कार्यालय है जो पूरी तरह से खंडर की स्थिति में तब्दील हो गया है, कार्यालय क़ी छत से पानी टपकता है, दीवारे लिंटर खस्ता हालत में हैं, जगह जगह पौधे भी निकल आये हैं।
जहां कार्यालय की स्थिति को देखते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष की अनुमति के बाद वित्तीय परामर्शदाता के नए कार्यालय के निर्माण हेतु अनुमति दी गई।


अब उस कार्यालय का निर्माण किया जा रहा है लेकिन निर्माण कार्य में कई अनियमिततायें भी सामने आ रही हैं,
जिसका वीडियो वायरल हो रहा हैं जिसमें निर्माण कार्य तो हो रहा है लेकिन घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है निर्माण में पीला ईंट लगाई जा रही है, पुरानी निकली हुई ईंटों को उपयोग में लाया जा रहा हैं निर्माण में लगाएं जा रहे सीमेंट की क्वालिटी बहुत खराब है।
वहीं नए वीपीटी कार्यालय का निर्माण नक्शे के अनुसार नहीं किया जा रहा हैं जो कहीं न कहीं मानकों को दरकिनार कर निर्माण किया जा रहा है पहले कार्यालय के नक्शे में से बरामदा स्वीकृत था बाद में हटा दिया गया है। कार्यालय को दो भागों में दीवार लगाकर विभाजित किया गया है। नक्शे के अनुसार दो शौंचालयों का निर्माण होना था लेकिन एक शौंचालय का ही निर्माण किया जा रहा है।निर्माण हो रहे कार्यालय का नक्शा एक बार पहले बनकर कम्प्लीट हो गया था। जिसको जेई द्वारा पास कर दिया गया था लेकिन नक्शे में दोबारा परिवर्तन किया गया नक्शे में से एक शौंचालय और बरामदा गायब कर दिया हैं, कार्यालय के बीच में एक दीवार खड़ी कर दी,और नया नक्शा बनाकर पास कर दिया गया और उसके अनुसार निर्माण कार्य हो रहा हैं।
कार्यालय के निर्माण में ओपीसी केटेगरी का काला प्रिंट सीमेंट इस्तेमाल किया जाना था लेकिन पीपीसी लाल घटिया किस्म के सीमेंट का निर्माण कार्य में उपयोग किया जा रहा है।

एक जानकारी अनुसार पता चला है कि निर्माण हो रहे कार्यालय की बनने की कुल लागत लगभग 9 लाख से ऊपर है जिसका निर्माण कार्य जिला पंचायत की और से निकाले गए निर्माण करने के लिए ठेके का कार्य स्थानीय फर्म कुसुमलता कंशट्रक्सन द्वारा किया जा रहा है। वहीं सूत्रों अनुसार बताया गया है कि कार्यालय के निर्माण में कार्यालय के बाबू की ठेकेदार के साथ हिस्सेदारी है।
यह मामला भ्रष्टाचार, अनियमितता और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का प्रतीक बन चुका है। जनता का पैसा सही तरीके से खर्च न होने, मानकों का उल्लंघन, और कथित मिलीभगत की बातें इस घटना को

गंभीर बना रही हैं। प्रशासन को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और निर्माण कार्य को मानकों के अनुरूप पूरा कराना चाहिए।
अपर मुख्य कार्य अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि कार्यालय का बिना मानक के निर्माण कार्य हो रहा है तो वह गलत है अगर ऐसा होता है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर भुगतान पर रोक लगाई जाएगी।

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