बदायूं। सहसवान सीएचसी क्षेत्र में बिना पंजीकरण निजी अस्पतालों का मकड़जाल फैला है, जिसमें फंसकर मरीजों की मौत हो जा रही है। वहीं आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में मात्र 104 निजी अस्पताल ही पंजीकृत है, लेकिन इससे कई गुना अधिक अस्पताल और क्लीनिक का संचालन हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने अब तक सहसवान में करीब एक दर्जन निजी अस्पतालों को नोटिस जारी किए है मगर निजी अस्पतालों के संचालकों पर नोटिस का कोई असर नहीं पड़ा है।बिना डॉक्टर मानक के धड़ल्ले से निजी

अस्पताल संचालन कर रहे हैं। कस्बे में”जनता नर्सिंग होम” के अलावा कई को नोटिस देने के बाद भी ऑपरेशन से डिलीवरी कर रहा हैं। जहां किसी के पास चिकित्सा संबंधी कोई डिग्री नहीं है। क्योंकि निजी अस्पतालों के संचालकों के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।जबकि स्वास्थ्य महकमे ने निजी अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कमर कस ली है। स्वास्थ्य महकमे का कहना है कि अवैध अस्पताल क्लिनिक के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जाएगा।

बिना पंजीकरण निजी पैथोलॉजी और रेडियोलॉजिस्ट के बिना अल्ट्रासाउंड सेंटर

निजी पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों का यहीं हाल है, जहां पैथोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है, लेकिन उनके केंद्रों का संचालन लंबे समय से चल रहा है। तहसील और ब्लॉक स्तर पर जो पंजीकृत अस्पताल हैं, वहां भी कम ही डिग्री धारक चिकित्सको की उपलब्धता है।


सिर्फ रजिस्ट्रेशन के दौरान उनकी डिग्री और रजिस्ट्रेशन संख्या देकर पंजीयन करा लिया जाता है, जबकि संचालक ही बिना लाइसेंस और डिग्री के चिकित्सक बनकर मरीजों का उपचार करता है।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने बताया कि 104 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। करीब एक दर्जन नोटिस जारी करने के साथ ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी साथ ही अभियान चलाकर बिना पंजीयन वाले अस्पतालों की जांच कराने के साथ कार्रवाई की जा रही है।

निजी अस्पतालों के यह है मानक

  • किरायानामा स्वयं के भवन का अभिलेख हाउस टैक्स रसीद व नक्शा की प्रति।
  • चिकित्सक एंव पैरामैडिकल के शैक्षिक अभिलेख एंव उप्र मैडिकल काउंसिल का पंजीकरण की प्रति एंव शपथ पत्र मूल रूप में।
  • चिकित्सा प्रतिष्ठान की एचएफआर आईडी।
  • चिकित्सक व पैरामैडिकल की एचपीआर आईडी।
  • बायोमैडिकल वेस्ट अनुबन्ध व प्रमाण पत्र।
  • उप्रप्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी प्रमाण पत्र।
  • अग्नि शमन विभाग द्वारा जारी फायर एनओसी।
  • विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा प्रदत्त एनओसी।