
राज्य कर विभाग की टीम ने जनपद बरेली के परसाखेड़ा स्थित बरेली प्लाइबोर्ड प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री को सील कर दिया। जानकारी के अनुसार उक्त फर्म पर लगभग ₹22 करोड़ की जीएसटी देयता लंबित थी।

करदाता फर्म द्वारा इस मामले में उच्च न्यायालय की शरण ली गई थी, लेकिन न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया। इसके बाद राज्य कर विभाग ने रिकवरी प्रक्रिया के तहत फैक्ट्री की कुर्की/जब्ती की कार्रवाई की। विभाग ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमों के तहत की गई है।
यह कार्रवाई संयुक्त आयुक्त के.के. गुप्ता के निर्देशन में संपन्न हुई। कार्रवाई दल में उप आयुक्त डी.के. सिंह, सहायक आयुक्त गौरव सिंह और सहायक आयुक्त अविरल मुद्गल शामिल रहे।

इस कार्रवाई की सूचना मिलते ही बरेली के उद्यमियों और व्यापारियों में हड़कंप मच गया। कई व्यापारियों और नेताओं ने अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह राजस्व से जुड़ा मामला है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत राजस्व वसूली को लेकर सख्ती बरती जा रही है, इसलिए कार्रवाई किसी भी कीमत पर नहीं रोकी जाएगी।

जीएसटी की निगाह और भी बड़े बकायदार व्यापारियों पर..
बरेली में बरेली प्लाइबोर्ड फैक्ट्री पर हुई बड़ी कार्रवाई के बाद अब जीएसटी विभाग का शिकंजा और कसता नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक जीएसटी चोरी, फर्जी बिलिंग और बकाया कर मामलों में कई अन्य बड़े उद्यमी भी विभाग के निशाने पर हैं।
जानकारी के अनुसार विभाग ने कुछ संदिग्ध फर्मों की फाइलें तैयार कर ली हैं और तकनीकी जांच के साथ-साथ दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि एक-दो दिन के भीतर बरेली और आसपास के क्षेत्रों में और भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

अंत में राज्य कर विभाग ने सभी व्यापारियों और करदाताओं से अपील की है कि अपने जीएसटी और वैट के बकाया का समय से भुगतान करें, ताकि इस प्रकार की कठोर कार्रवाई से बचा जा सके।