खैरथल तिजारा जिले के निकटवर्ती जिले अलवर में नाटक महाराज भर्तृहरि का विधिवत्त शुभारंभ 4 अक्टूबर को अपार दर्शकों के बीच हुआ। महान धार्मिक सामाजिक एवं ऐतिहासिक नाटक में आज एक राजा का न्याय क्या होना चाहिए, नीति शतक के अंतर्गत अपार दर्शकों के बीच प्रदर्शित हुआ नाटक का प्रारंभ भोलेनाथ से निराला मधुर गायन के साथ होता है और इसके तुरंत बाद भर्तृहरि का नीति शतक के अंतर्गत एक न्याय प्रिय राजा को दर्शाया गया है। दरबार में एक तेली अपनी फरियाद लेकर आता है की महाराज मेरा न्याय कीजिए मैं बड़ी मेहनत करके एक-एक पाई पाई इसका कर्ज सेठ जी का चुका दिया है लेकिन यह दोबारा माग़ कर मेरी गर्दन पर कुठाराघात कर रहे हैं इस पर भरतरी हरी न्याय करते हुए नगर सेठ माया दास को दरबार से बाहर जाने के लिए कहते हैं इसके उपरांत दो औरतें अपना न्याय कराने के लिए दरबार में आती हैं एक विधवा और एक सरधुवा औरत दोनों रहती है कि यह बच्चा मेरा है भर्तृहरि कहते हैं कि हमें यह न्याय करना ही होगा विपत्ति में देखकर बछड़े कोनहीं छुपेगी नहीं छुपेगी कि आग छाती में मां की वह है जो नहीं छुपेगी नहीं छुपेगी और वह एक बाधिक को बुलाते हैं और कहते हैं कि इस बालक के दो टुकड़े कर दो आधा इसको दे दो और आधा उसको दे दो इस पर विधवा औरत कहती है नहीं महाराज नहीं इसे ही दे दो लेकिन मैं अपने बच्चे का वध ना होने दूंगी इस पर भर्तृहरि औरत को कहते हैं कि यह बालक तुम्हारा नहीं इसका है इस पर प्रधान सचिव विद्यासागर बोलते हैं असली माता हो गई प्रकट क्या सुंदर सरल उपाय किया जल और दूध कर दिया पृथक वह राजहंस ने न्याय किया
मुख्य कलाकारों में भर्तृहरि का प्रभावी अभिनय श्री ललित मिश्रा ने बड़ी ही परिपक्व कला का परिचय देते हुए दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी वही प्रधान सचिव विद्यासागर का अभिनय श्री लोकेश मिश्रा ने बखूबी निभाया तेली के रूप में श्री मनोज कुमार गोयल और सेठ माया दास के रूप में श्री देवराज शर्मा ने भी दर्शकों पर काफी प्रभाव डाला राजपुरोहित की भूमिका आचार्य राजेंद्र शर्मा ने और विक्रम का प्रभावी अभिनय सुभाष गॉड ने किया महारानी पिंगला का अभिनय जयपुर से आई महिला कलाकार श्रीमती ज्योत्सना एवं मोहिनी का अभिनय कुमारी गीता ने अपनी कुशल अभिनीत कल का परिचय देते हुए किया जिसे मुक्त कंठ से दर्शकों ने सराहा।
