
बदायूं। सदर तहसील क्षेत्र में एक ऐसा भी गांव भटौली है, जहां आजादी के सात दशक बाद भी एक अदद पिच सड़क के लिए ग्रामीण तरस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है यही नहीं, यह गांव समग्र विकास योजना के अंतर्गत चयनित भी हो चुका है, लेकिन विकास इससे कोसों दूर है। जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक उपेक्षा कारण आज भी यहां के ग्रामीण कच्चे मार्ग से गांव से बाहर आने-जाने के लिए विवश हैं।

सलारपुर ब्लाक मुख्यालय से मात्र 17 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत भटौली जाने के लिए आज तक कोई सुगम रास्ता नहीं बना है। करीब एक हजार आबादी वाले इस गांव के ग्रामीण विद्यार्थियों को प्राथमिक विद्यालय तो बना हुआ है लेकिन इसके ऊपर की शिक्षा के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता है भटौली से बिनावर, घटपुरी रेलवे स्टेशन जाने के लिए मिट्टी से बनी चकरोड से होकर अपना सफर तय करना पड़ता हैं। सबसे अधिक समस्या बरसात के दिनों में होती है। जहां कीचड़ से सनी सड़क पर पैदल, साइकिल तथा स्कूली बच्चों को काफी मुसीबतों से होकर गुजरना पड़ता है। चार पहिया वाहन तो फंस कर रह जाते हैं भटौली गांव से आसिर्स के जाने के लिए कच्ची सड़क भी नहीं है। जहां बरसात के दिनों में स्कूली बच्चों के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।जबकि इस गांव की सड़क बनने से गांव बरेली हाइवे से सीधा जुड़ेगा। गांव से बरेली जाने के लिए 10 किलोमीटर का फासला कम हो जाएगा।

ग्रामीण राजनेताओं से दुखी…..
ग्रामीणों में भगवान दास, राम अवतार अमरजीत, नरेश पाल, नेत्रपाल, रामप्रताप, असगर, सद्दाम,कुंवर पाल, रामचंद्र, धारा सिंह, खूबचंद, जगबीर, बेनीराम, कल्लू ,राम सिंह चरण सिंह, राजू ठाकुर, गंगासहाय, सुशील, आदि का कहना है कि हर बार चुनाव में राजनीतिक दल के लोग सड़क को पिच कराने का वादा करते हैं, लेकिन फिर पलट कर इस गांव की तरफ नहीं देखते।ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि शीध्र गांव में सड़क नहीं बनी तो वह आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।
ग्राम प्रधान मिथिलेश कुमारी का कहना है कि गांव से सिंगरौरा सड़क निर्माण के लिए जिला पंचायत सदस्य कहा था आश्वासन देने के देने के बाद भी उन्होंने सड़क नहीं बनवाई। मिट्टी से बनी सड़क टूट गई है उसकी कल मरम्मत करा देंगे।






